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सोमवार, 5 अक्तूबर 2009

‘मैं नास्तिक हूं’

‘आस्थावान वैज्ञानिकों’ पर मेरे मित्र एस्ट्रोनॉमर बलदेवराज दावर की प्रतिक्रिया...

सीना तानकर और भुजा उठाकर कहो – कि मैं नास्तिक हूं
ऊंची से ऊंची जगह पर खड़े होकर कहो – कि मैं नास्तिक हूं
सारी दुनिया को सुनाकर कहो – कि मैं नास्तिक हूं
क्योंकि नास्तिक एक सच्चा और खरा इन्सान होता है
वो अपने मां-बाप की संतान होता है
वो कहीं आसमान से नहीं टपका था
वो कभी शून्य से नहीं प्रकटा था
भूत-प्रेत की तरह वो कहीं से आया नहीं था
वो अपने मां-बाप के शरीर से उगा था, किसी ईश्वर की कृपा से नहीं
किसी देवी-देवता की दया से नहीं
नास्तिक जीने के लिए पैदा होता है, और किसी मकसद से नहीं
अपने सहज स्वभाव से ही, वो जीभरकर जीना चाहता है
वो भरपूर जीना चाहता है, हर हाल में जीना चाहता है
इसीलिए तो वो हमेशा अपने को बचाता है, अपनी रक्षा करता है
और अपनी मौत को टालने का उपाय करता है
मरने के बाद भी वो अमर रहता है, और संतानों के रूप में खुद को अमर कर लेता है
वो मुक्ति नहीं चाहता, निर्वाण नहीं चाहता, जन्म-मरण के बंधनों से आजादी नहीं चाहता
अपने माता-पिता को वो सच्चा माता-पिता मानता है
उनका आदर करता है, सम्मान करता है, सेवा करता है
वो अपने बच्चों को प्यार करता है, पालन करता है, उनकी रक्षा करता है
वो अपने भाई-बहनों, सगे-संबंधियों का सगा होता है, उनको सहारा देता है-उनका सहारा लेता है
वो उनसे सच्चा इश्क करता है....लव करता है
वो जानता है कि इस दुनिया में वो अकेला नहीं, अलग नहीं और न ही स्वतंत्र है
यहां हर कोई-हर किसी पर निर्भर है...हर कोई-हर किसी का सहारा है
इसीलिए वो खुद को मानव समाज का सहज सदस्य मानता है...प्राणीजगत का अभिन्न अंश मानता है
उनसे विमुख होकर वो सीधे ईश्वर से नाता नहीं जोड़ता...नो डायरेक्ट हॉट लाइन फॉर हिम
भक्त लोग खुद को पापी-खल और कामी मानते हुए भी, और बताते हुए भी उम्मीद करते हैं कि ईश्वर उनके मुंह से अपनी प्रशंसा सुनकर खुश हो जाएगा
वो उनसे उपहार औप चढ़ावे लेकर प्रसन्न हो जाएगा...और उनकी पुकार सुनकर पसीज जाएगा
और उन्हें क्षमा कर देगा
बेचारे नास्तिक को ये सुविधा प्राप्त नहीं..ये दरवाजा उसपर खुला नहीं
इसलिए वो पहले ही पापकर्म करने से डरता है..और आचरण को साफ-सुथरा रखता है
वो ईश्वर को नहीं मानता-भगवान को नहीं मानता...इसीलिए वो हर तरह के ऐल-गैल और आलतू-फालतू ढकोसलों को भी नहीं मानता
देवी-देवताओं, जिन्न-भूतों, अगले-पिछले जन्मों, हाथ की लकीरों, स्वर्ग-नर्क की कहानियों, पीर-फकीरों की कब्रों, पहुंचे हुए महापुरुषों की समाधियों, नाम-ध्यान, भजन-कीर्तन, यज्ञ-हवन, पूजा-पाठ, व्रत-उपवास, अरदास-निमाज, जादू-टोनों, गुरुमंत्रों, अवतारों-पैगंबरों, चमत्कारों-सिद्धियों, प्राचीन काल की उपलब्धियों, वगैरा-वगैरा और इत्यादि-इत्यादि को नहीं मानता
नास्तिक इस तरह का बोझा बगैर सोचे-समझे-परखे नहीं ढोता
वो अपने परिवार और समाज में रचा-बसा खुश रहता है

Baldev Raj Dawar, E 610, Mayur Vihar II, Delhi–91 Mob. 9891552685
http://brdawar.blogspot.com

2 टिप्‍पणियां:

  1. नमस्ते ....
    आपका ब्लॉग पढा पढ़कर आनंद मिला
    ऐसे ही विवरण ब्लॉग में रखा करे
    ऐसी
    आशा सह ...सादर धन्यवाद ...


    दीपक सोंदरवा

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