फ़ॉलोअर

यूएफओ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
यूएफओ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 6 जुलाई 2010

रोजवेल यूएफओ राज(?) के 63 साल


स्टूडेंट्स के साथ एक इंटरैक्शन के दौरान एक छात्र ने मुझसे रोजवेल यूएफओ वाली मशहूर घटना का जिक्र किया। वो जानना चाहता था कि यूएफओ की घटनाओं में कितनी हकीकत है और कितना फ़साना? ये ऐसा सवाल है जिसका सही-सही जवाब किसी के पास नहीं है। मैंने उसे प्रोजेक्ट ब्लूबुक से लेकर पिछले साल तक अपने देश के टीवी न्यूज चैनल्स में नजर आ रहे यूएफओ की भीड़ के तमाम सारे किस्से सुना डाले, लेकिन अंत में मैंने उसे यही बताया कि इस सवाल का सही जवाब किसी के पास नहीं है। लेकिन इस स्टूडेंट ने मुझे याद दिला दिया कि ये मशहूर घटना 63 साल पुरानी हो गई है। जब इस खबर के साथ दुनियाभर तेज सनसनी दौड़ गई थी कि अमेरिका के न्यू मैक्सिको के रोजवेल कस्बे के बाहर एक उड़नतश्तरी दुर्घटनाग्रस्त हो गई है। खबर के विवरण चौंका देने वाले थे, कि हादसे का शिकार बनी यूएफओ से एलियन्स भी बरामद किए गए हैं और अमेरिकी वायुसेना इस पूरे वाक्ये पर पर्दा डालने में जुटी है। ये खबर इतनी सनसनीखेज थी कि यूएफओलॉजिस्ट अब तक इसकी मिसालें देते हैं।
लेकिन रोजवेल घटना के राज जानने के बजाय मेरी दिलचस्पी ये जानने में ज्यादा है कि अगर वाकई रोजवेल के रेगिस्तान में कोई यूएफओ गिरी थी, तो आखिर वो आई कहां से होगी? यूएफओलॉजिस्ट इस सवाल का जवाब भी देते हैं, उनके मुताबिक रोजवेल की यूएफओ हमसे करीब 39 प्रकाश वर्ष दूर दक्षिणी आसमान में मौजूद डबल स्टार सिस्टम 'जेटा रेटिकुली' की परिक्रमा कर रहे किसी ग्रह से आई थी।

हमारा सूरज और सौरमंडल सिंगल स्टार सिस्टम है, यानि एक सूरज की परिक्रमा करते कई ग्रह। जबकि 'जेटा रेटिकुली' सिस्टम दो सितारों से बना है, जो एक-दूसरे से करीब 800 अरब मील दूर हैं। 'जेटा रेटिकुली' डबल स्टार सिस्टम को यूएफओ के किस्से से जोड़ने का काम 1970 में किया था अमेरिका के ओहायो की एक स्कूल टीचर ने। मारजोरी फिश नाम की इस स्कूल टीचर का दावा था कि उसने 1961 के एक यूएफओ एबडक्शन केस के विवरणों से एक स्टार मैप बनाया है, जो ये बताता है कि एलियन्स कहां से आए थे। 1961 का ये एलियन एबडक्शन केस यानि एलियन्स के हाथों अगवा हो जाने का मामला, सबसे पहले पत्रकार जॉन फुलर की पुस्तक 'इंसीडेंट ऐट एक्सेटर : द इंट्रप्टेड जर्नी' के जरिए दुनिया के सामने आया। किस्सा कुछ यूं है कि दावा किया गया था कि न्यू इंग्लैंड की एक दंपत्ति को एलियन्स उठा ले गए थे और यूएफओ में उनका मेडिकल परीक्षण भी किया गया था।


जांचकर्ताओं ने जब हकीकत जानने के लिए एलियन एबडक्शन का दावा कर रही महिला बेट्टी हिल को सम्मोहित किया, तो सम्मोहन के दौरान उसने स्टारमैप का एक स्केच बनाया....उसका दावा था कि उसने सितारों का ये रास्ता एलियन स्पेसशिप के भीतर से देखा था। ये 1970 का शुरुआती दौर था, तब कंप्यूटर टेक्नोलॉजी इतनी एडवांस नहीं थी, इसलिए इस किस्से में दिलचस्पी लेने वाली ओहायो की स्कूल टीचर मारजोरी फिश ने लोहे का सामान्य तार और मोतियों के इस्तेमाल से उस स्टार मैप का मॉडल बनाया। फिर उसे लेकर घर के पिछवाड़े से सितारों भरे आसमान में एलियन्स के घर का ठिकाना तलाशने में जुट गई। संयोग से उसका मॉडल दक्षिणी आसमान में मौजूद स्टार सिस्टम 'जेटा रेटिकुली' से मेल खा गया। बस फिर क्या था, यूएफओ और एलियन्स के किस्सों में दिलचस्पी रखने वालों को एक नई कहानी मिल गई और रोजवेल यूएफओ के किस्से को भी इसीसे जोड़ दिया गया। ये बात अलग है कि हमसे 39 प्रकाश वर्ष दूर इस स्टार सिस्टम में जीवन के निशान की बात तो छोड़िए, किसी ग्रह की मौजूदगी के भी प्रमाण अब तक नहीं मिले हैं।

शनिवार, 21 मार्च 2009

यूएफओ पर नई बहस

क्या ये यूएफओ हैं ? लंदन के बिल्डर डेरेक बर्डन की मानें तो हां, ये तस्वीर भी उन्होंने ही खींची है। धरती से परे जीवन है या नहीं ? सदियों पुराने इस सवाल के हालिया संदर्भ देखें तो नासा के केप्लर मिशन ने एक बार फिर इस पुराने सवाल पर नई बहस की शुरुआत की। धरती से परे जीवन पर कुछ भी कहने- न कहने से बचते हुए इसरो ने पृथ्वी की सतह से 40 किलोमीटर ऊपर बैक्टीरिया जैसे सूक्ष्मजीवों की मौजूदगी खोजने की घोषणा की। लेकिन साइंस से परे इस सवाल पर अपने ढंग का एक नया एंगिल जोड़ दिया है इस तस्वीर ने।
इस तस्वीर का किस्सा कुछ यूं है कि लंदन के वेस्ट एंड में मौजूद कोवेंट गार्डन इलाके में बिल्डर डेरेक बर्डन 16 मंजिली इमारत के निर्माण का काम देख रहा था। वाक्या 14 मार्च का है, और उस दिन 40 साल का ये बिल्डर अपनी निर्माणाधीन इमारत ओरियन हाउस की 16वीं मंजिल पर मौजूद था, और उसकी घड़ी लंदन की सुबह के साढे आठ बजा रही थीं। बर्डन कुछ सामान के आने का इंतजार कर रहा था इसलिए वक्त काटने के लिए वो अपने मोबाइल कैमरे से इस ऊंचाई से लंदन स्काई का पैनोरमा शॉट लेने लगा। बर्डन ये शॉट अपनी पत्नी साराह के लिए ले रहा था, जो लंदन से दूर रहती थी। उस दिन और कुछ नहीं हुआ, बर्डन ने फोटोग्राफ्स लिए और फिर अपने काम में खो गया।
घर जाकर जब उसने ये फोटेग्राफ्स अपनी पत्नी साराह को दिखाए तो साराह ने इन तस्वीरों में मौजूद यूएफओ जैसी आकृतियों को पहली बार पहचाना। साराह ने पूछा कि आसमान के दाईं ओर ये लाइट्स जैसी क्या चीज नजर आ रही है ? बर्डन का कहना है कि वो खुद यूएफओ के वजूद पर यकीन नहीं रखता लेकिन ये फोटोग्राफ देखकर वो भी हैरत में पड़ गया। उसने बताया कि मुझे नहीं पता कि ये यूएफओ जैसी नजर आ रही चीजें क्या हैं, मैंने इन तस्वीरों से जरा भी छेड़छाड़ नहीं की है और ये वैसी ही हैं जैसाकि उस दिन आसमान नजर आ रहा था। क्या ये प्रकाश के परावर्तन का कमाल है ? अगर हां, तो सवाल ये कि प्रकाश आखिर किस चीज से परावर्तित हो रहा था, खैर इतना जरूर है कि इस तस्वीर ने यूएफओ के वजूद को लेकर एक बहस फिर से छेड़ दी है।