
यूरोपीय स्पेस एजेंसी द्वारा छोड़ी गई हर्शेल स्पेस ऑब्जर्वेटरी पर लगे स्पायर नाम के उपकरण के जरिए वैज्ञानिक 12 अरब से ज्यादा पुराने समय में झांकने में कामयाब हुए हैं। माना जाता है कि करीब 13 अरब साल पहले बिग बैंग हुआ था। इसके तुरंत बाद आकाशगंगाओं के बनने की प्रक्रिया किस तरह परवान चढ़ी, स्पायर द्वारा खींची गई तस्वीरों से इसका राज खुलने की उम्मीद बढ़ गई है। स्पायर यानी स्पेक्ट्रल एंड फोटोमीट्रिक इमेजिंग रिसीवर से खींची गईं इमेज बहुत स्पष्ट और गहरी हैं, इनकी स्टडी करके यह पता लगाया जाएगा कि तारों और गैलेक्सियों का निर्माण कैसे होता है और वे किस तरह विकसित होकर मौजूदा रूप में आईं। इनसे दूर स्थित आकाशगंगाओं का पता लगाना भी मुमकिन होगा। आकाशगंगाओं में स्थित विशालकाय ब्लैक होल की जानकारी भी मिल सकेगी। दरअसल, हर गैलेक्सी से चारों तरफ रेडिएशन फैलता है। हमारे सोलर सिस्टम की तरफ आ रही इन किरणों को हर्शेल ने पकड़ा है। स्पायर ने दूरदराज के ऑब्जेक्ट्स से आते रेडिएशन को डिटेक्ट करने में मदद की। इन तस्वीरों से हजारों ऐसी गैलेक्सियों का पता चला है, जो अपने निर्माण के शुरुआती दौर में हैं। अब स्पायर टीम इनके फिजिकल और केमिकल प्रोसेस का अध्ययन कर रही है। स्पायर उपकरण हर्शेल ऑब्जर्वेटरी पर लगा है। हशेर्ल को यूरोपीय स्पेस एजेंसी ने मई 2009 में लॉन्च किया था। यह धरती से करीब 10 लाख मील दूर रहकर चक्कर काट रही है। हर्शेल पहली ऐसी स्पेस ऑब्जर्वेटरी है, जो एक मिलीमीटर से भी कम वेवलेंथ वाली हाई रिजॉल्यूशन तस्वीरें खींचने में सक्षम है। इन इमेजों की स्टडी करने में छह देशों के 100 से ज्यादा एस्ट्रॉनॉमर जुटे हुए हैं। हर्शेल मिशन का एक बड़ा मकसद यह पता लगाना है कि शुरुआती दौर में आकाशगंगाओं का निर्माण कैसे हुआ और किस तरह वे इतनी विशालकाय बनीं।
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