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रविवार, 17 नवंबर 2013

डॉ. भाभा को भारत रत्न से सम्मानित करें: डॉ. राव


देश ने दो दिग्गजों सचिन तेंदुलकर और डॉ.सीएनआर राव को उनके अलग-अलग क्षेत्रों क्रिकेट और साइंस में अतुलनीय योगदान के लिए भारत रत्न से सम्मानित किया है. ये बात अलग है कि सचिन के जश्न में डॉ. राव की खबर दब सी गई है, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि सचिन और उम्र में उससे दोगुने बड़े डॉ. राव दोनों ही 'मास्टर ब्लास्टर' हैं. सचिन को जहां लोग क्रिकेट का भगवान कहते हैं, वहीं डॉ. राव सॉलिड स्टेट साइंस में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने आप में एक इंस्टीट्यूशन, एक प्राधिकरण के रूप में मशहूर हैं.

 डॉ. सीएनआर राव क्रिकेट के विरोधी नहीं हैं, लेकिन ये भी सच है कि वो निजी जीवन में क्रिकेट को बहुत ज्यादा पसंद भी नहीं करते हैं. एक यूनिवर्सिटी में अपने व्याख्यान के दौरान उन्होंने कहा भी था कि क्रिकेट ने इस देश में साइंस को पीछे धकेल दिया है. उन्होंने कहा था कि आप सचिन को भारत रत्न देना चाहते हैं तो जरूर दीजिए, लेकिन जरा इस देश के लिए डॉ. भाभा के योगदान को भी याद कर लीजिए, जिन्हें अब तक भारत रत्न से सम्मानित नहीं किया गया है. दिसंबर 2011 में डॉ. राव ने बकायदा केंद्र सरकार से मांग की थी कि डॉ. होमी जहांगीर भाभा को उनके अतुलनीय योगदान के लिए भारत रत्न से सम्मानित किया जाए.

ये भी अनोखा संयोग है कि डॉ. भाभा से पहले खुद डॉ. सीएनआर राव को ही भारत रत्न से सम्मानित कर दिया गया और वो भी खुद क्रिकेट के महानायक सचिन तेंदुलकर के साथ. देश ने विज्ञान और क्रिकेट दोनों को एकसाथ सम्मानित किया है. डॉ. सीएनआर राव भारत रत्न से सम्मानित होने वाले देश के तीसरे वैज्ञानिक हैं. उनसे पहले अब तक केवल तीन वैज्ञानिकों डॉ. सीवी रमन और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को ही भारत रत्न से सम्मानित किया गया है.

देश के परमाणु कार्यक्रम के जनक डॉ. होमी जहांगीर भाभा, देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम के प्रणेता डॉ. विक्रम साराभाई, सतीश धवन, बीरबल साहनी, जगदीश चंद्र बोस, शांति स्वरूप भटनागर, महान गणितज्ञ रामानुजन, सुब्रमणियम चंद्रशेखर, हरित क्रांति के जनक महान बायोटेक्नोलॉजिस्ट एमएस स्वामीनाथन, आनिल काकोदकर और भी कई महान वैज्ञानिक ऐसे हैं देश के विकास को इस स्तर तक ले आने में जिनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता, उन्हें भारत रत्न नहीं मिला. भारत रत्न तो छोड़िए इनमें से कुछ वैज्ञानिकों को तो पद्मश्री तक नहीं दिया गया है. सरकारें अपने वैज्ञानिकों को भूल गईं और अब इनकी कहानियां स्कूलों की किताबों से दूर होते-होते नई पीढ़ी की चेतना से भी लुप्त हो चली हैं.

इसी साल 24 जनवरी को चीन ने भारत और चीन के बीच वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत करने के लिए  डॉ. सीएनआर राव को अपने देश के शीर्ष विज्ञान पुरस्कार से सम्मानित किया था. भारत रत्न से सम्मानित किए जाने वाले देश के प्रमुख रसायन वैज्ञानिक डॉ.सीएनआर राव को सॉलिड स्टेट एवं और स्ट्रक्चरल कैमिस्ट्री के क्षेत्र में दुनियाभर में एक अथॉरिटी होने का सम्मान प्राप्त है. वो पदार्थ की ठोस अवस्था और संरचनात्मक रसायन शास्त्र के प्रति पूरी तरह से समर्पित वैज्ञानिक हैं.पदार्थ के गुणों और उनकी आणविक संरचना के बीच आधारभूत समझ को विकसित करने में उन्होंने उल्लेखनीय भूमिका निभाई है.50 साल से भी ज्यादा वक्त से वो अलग-अलग रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं. दुनिया के अलग-अलग जर्नल्स में उनके करीब 1400 शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं. उन्होंने करीब 50 पुस्तकों का लेखन अथवा संपादन किया है.

डॉ. राव ने देश की वैज्ञानिक नीतियों को बनाने में भी अग्रणी भूमिका निभाई है. इस समय डॉ. राव प्रधानमंत्री की वैज्ञानिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष हैं. वह सन 1985 में प्रथम बार और सन 2005 में दूसरी बार इस समिति के अध्यक्ष नियुक्त हुए हैं. राव कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित हुए. सन 1964 में उन्हें 'इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेस' का सदस्य नामित किया गया. सन 1967 में 'फैराडे सोसायटी ऑफ इंग्लैंड' ने राव को मार्लो मेडल प्रदान किया गया. डॉ. राव ने 1951 में मैसूर यूनिवर्सिटी से अपनी बैचलर डिग्री ली और दो साल बाद बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की डिग्री ली. डॉ.राव ने पर्डयू यूनिवर्सिटी से 1958 में पीएच.डी. की. दुनियाभर की दर्जनों यूनिवर्सिटीज ने डॉ. राव को मानद डॉक्टरेट से सम्मानित किया है.

डॉ. राव काफी बेबाक भी हैं, मंगलयान लांचिंग से ऐन पहले जब पूर्व इसरो अध्यक्ष माधवन नायर ने मंगलयान को आधा-अधूरा मिशन बताते हुए इसे महज प्रचार का हथकंडा बताया तो डॉ. राव ने उन्हें जमकर लताड़ लगाई. मंगलयान लांच से पहले अपनी प्रतिक्रिया में उन्होंने कहा कि इसरो ने मिशन में जल्दबाजी कर दी, उन्हें अभी होमवर्क पर और वक्त देना चाहिए था. लेकिन अब जबकि मिशन तैयार है, हमें वैज्ञानिकों के हौसले और कुछ नया कर दिखाने के जज्बे की सराहना करनी चाहिए.

 डॉ. राव को भारत रत्न सही दिशा में एक बेहतर शुरुआत है, जिससे एक उम्मीद सी बंधती है कि देश अब शायद डॉ. भाभा और डॉ. साराभाई जैसे अपने विज्ञान नायकों को भी देर से ही सही, लेकिन शीर्ष सम्मान से सम्मानित करेगा.

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