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मंगलवार, 18 अगस्त 2009

E=mc² बाद, एक नई खोज d E= Ac²dm

देश के ज्यादातर रिसर्च इंस्टीट्यूट्स क्या कर रहे हैं, आम आदमी की तो छोड़िए, आमतौर पर मीडिया तक भी इसकी कोई खबर नहीं आती। .............. अबतक किसी वैज्ञानिक ने मेरे शोध पर आपत्ति या कोई टिप्पणी नहीं की, मेरा शोध एक खुली किताब है।
- अजय शर्मा
नोट -  कई बार तमाम सावधानियों के बावजूद गलतियां हो जाती हैं... ये लेख, मुझसे हुई ऐसी ही एक गलती का नतीजा है...ये लेख शिमला के एक सरकारी स्कूल के प्रधानाचार्य श्री अजय शर्मा के कथित शोध से संबंधित था। इसमें लेखक ने आइंस्टीन के मशहूर पदार्थ-ऊर्जा के समीकरण को अधूरा बताते हुए अपने शोध के जरिए उसे पूरा करने का दावा किया था। लेखक के दावे और उनके बार-बार प्रकाशन के अनुरोध के चलते मैंने उनके शोध को 'वॉयेजर' पर प्रकाशित किया था। लेकिन अब इस कथित शोध के संबंध में नए तथ्य सामने आए हैं और श्री अजय शर्मा का तथाकथित शोध संदेहास्पद और महज शोहरत कमाने की एक चाल साबित हुआ है। इसलिए श्री अजय शर्मा के इस संदेहास्पद शोध को वॉयेजर से हटाया जा रहा है। मैं ऐसे संदेहास्पद शोध को प्रकाशित करने के लिए पाठकों से क्षमायाचना करता हूं और भरोसा दिलाता हूं कि वॉयेजर में कोई भी सामग्री भविष्य में प्रकाशित करने से पहले पर्याप्त सावधानी बरतने के साथ विशेषज्ञों से उसकी पड़ताल भी अवश्य करवाई जाएगी।

सादर
संदीप निगम

मंगल पर भारतीय स्पेसक्राफ्ट 2013 में

मून मिशन के बाद अब इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) ने अगले छह साल में मंगल ग्रह पर भी स्पेसक्राफ्ट भेजने की तैयारी शुरू कर दी है। इस बारे में की जाने वाली स्टडी, मिशन के रूट और दूसरी संबंधित डिटेल के बारे में सरकार ने भी 10 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इसरो के चेयरमैन जी. माधवन नायर के मुताबिक, मिशन से जुड़ी स्टडी पहले ही पूरी की जा चुकी है। अब हम वैज्ञानिक प्रस्ताव और उद्देश्य तलाश रहे हैं। उन्होंने यह बात यहां एस्ट्रोनॉटिकल सोसायटी ऑफ इंडिया की एक वर्कशॉप में कही। उन्होंने बताया कि हम 2013 और 2015 के बीच लॉन्च की कोशिश करेंगे। शुरुआती प्लान के मुताबिक इसरो 500 किलोग्राम वाला स्पेसक्राफ्ट मंगल पर भेजेगा। इसके लिए तीन लॉन्च विंडोज की पहचान हुई है, पहला 2013 में दूसरा 2016 और तीसरा 2018 में। अभी यह तय नहीं हुआ है कि यह एक्सक्लूसिव मिशन होगा या इंटरनैशनल एक्सपेरिमेंट भी शामिल किए जाएंगे। गौरतलब है कि भारत 2012 में चंद्रयान-2 मिशन के तहत रोबॉट को चांद पर भेजना चाहता है। 2015 तक वह स्पेस में इंसान को भेजना चाहता है। विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर के डायरेक्टर के. राधाकृष्णन ने बताया कि कई युवा वैज्ञानिकों को इस मिशन से जोड़ा जा रहा है। खासकर इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ स्पेस टेक्नॉलजी, फिजिकल रिसर्च लैबरटरी, टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च और दूसरी रिसर्च लैब से आए यंग साइंटिस्ट इससे जुड़ रहे हैं।

चंद्रयान-2 का डिजाइन तैयार

भारत ने अपने चंद्रयान-2 का डिजाइन बना लिया है। इसके लिए रूस का सहयोग लिया गया है। इस बार मून मिशन के लिए जाने वाले चंद्रयान में एक लैंडर और रोवर भी होगा, ताकि चांद की मिट्टी का सैंपल लिया जा सके और इससे मिलने वाले डेटा को धरती पर भेजा जा सके। इसरो के चेयरमैन जी. माधवन नायर ने बताया, फिलहाल, डिजाइन तैयार है। हमने रूसी वैज्ञानिकों के साथ इसका एक जॉइंट रिव्यू किया है। इसरो के मुताबिक, चंद्रयान-2 में एक ऑर्बिटल फ्लाइंग वीइकल होगा, जिसमें एक ऑर्बिटल क्राफ्ट और एक लूनर क्राफ्ट होगा जो लूनर ट्रांसफर ट्रेजेक्टरी तक सॉफ्ट लैंडिंग सिस्टम को ले जाएगा। चंद्रमा पर उतरने वाले इस लैंड रोवर की लोकेशन चंद्रयान-1 द्वारा भेजे गए डेटा से तय होगी। इसरो की जिम्मेदारी होगी ऑर्बिटर डिवेलप करना और रूस लैंडर और रोवर बनाएगा। बाकी के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण दुनिया भर की साइंटिफिक कम्युनिटीज से जुटाए जाएंगे। माधवन नायर का कहना था कि अब जबकि डिजाइन तैयार हो चुका है, हमारा अगला कदम होगा चंद्रयान-2 का एक नमूना बनाना। यह अगले साल तक तैयार हो जाएगा। नायर ने बताया कि चंद्रयान-1 मिशन से बहुत कुछ सीखने को मिला है। वह कहते हैं, मेरे ख्याल में हमें चांद की सतह से होने वाले हीट रेडिएशन के बारे में काफी कुछ जानने को मिला है। इसी के मुताबिक आने वाले स्पेसक्राफ्ट का थर्मल डिजाइन बनाया जाएगा।