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मंगलवार, 18 अगस्त 2009

E=mc² बाद, एक नई खोज d E= Ac²dm

देश के ज्यादातर रिसर्च इंस्टीट्यूट्स क्या कर रहे हैं, आम आदमी की तो छोड़िए, आमतौर पर मीडिया तक भी इसकी कोई खबर नहीं आती। .............. अबतक किसी वैज्ञानिक ने मेरे शोध पर आपत्ति या कोई टिप्पणी नहीं की, मेरा शोध एक खुली किताब है।
- अजय शर्मा
नोट -  कई बार तमाम सावधानियों के बावजूद गलतियां हो जाती हैं... ये लेख, मुझसे हुई ऐसी ही एक गलती का नतीजा है...ये लेख शिमला के एक सरकारी स्कूल के प्रधानाचार्य श्री अजय शर्मा के कथित शोध से संबंधित था। इसमें लेखक ने आइंस्टीन के मशहूर पदार्थ-ऊर्जा के समीकरण को अधूरा बताते हुए अपने शोध के जरिए उसे पूरा करने का दावा किया था। लेखक के दावे और उनके बार-बार प्रकाशन के अनुरोध के चलते मैंने उनके शोध को 'वॉयेजर' पर प्रकाशित किया था। लेकिन अब इस कथित शोध के संबंध में नए तथ्य सामने आए हैं और श्री अजय शर्मा का तथाकथित शोध संदेहास्पद और महज शोहरत कमाने की एक चाल साबित हुआ है। इसलिए श्री अजय शर्मा के इस संदेहास्पद शोध को वॉयेजर से हटाया जा रहा है। मैं ऐसे संदेहास्पद शोध को प्रकाशित करने के लिए पाठकों से क्षमायाचना करता हूं और भरोसा दिलाता हूं कि वॉयेजर में कोई भी सामग्री भविष्य में प्रकाशित करने से पहले पर्याप्त सावधानी बरतने के साथ विशेषज्ञों से उसकी पड़ताल भी अवश्य करवाई जाएगी।

सादर
संदीप निगम

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