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मंगलवार, 23 सितंबर 2014

भारत...अब मंगल की कक्षा में

भारत अब मंगल की कक्षा में पहुंच चुका है. देश ने सीमित संसाधनों में असाधारण उपलब्धि अर्जित की है. मंगलयान ने भारत को दुनिया के ऐसे पहले देश का गौरव दिला दिया है मंगल पर पहुंचने की जिसकी पहली ही कोशिश कामयाब रही है.
भारत के मंगल अभियान का निर्णायक चरण 24 सितंबर को सुबह यान को धीमा करने के साथ ही शुरू हो गया था. मंगलयान की गति धीमी करनी थी ताकि ये मंगल की कक्षा में गुरूत्वाकर्षण से खुद-बखुद खिंचा चला जाए और वहां स्थापित हो जाए.
मंगलयान से धरती तक डेटा पहुंचने में करीब 12:30 मिनट का समय लग रहा है. सुबह लगभग 8.00 बजे इसरो को मंगलयान से सिग्नल प्राप्त हुआ और ये सुनिश्चित हो पाया कि मंगलयान मंगल की कक्षा में स्थापित हो गया है.
मंगलयान का आकार लगभग एक नैनो कार जितना है, तथा संपूर्ण मार्स ऑरबिटर मिशन की लागत कुल 450 करोड़ रुपये या छह करोड़ 70 लाख अमेरिकी डॉलर रही है, जो एक रिकॉर्ड है. यह मिशन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइज़ेशन या इसरो) ने 15 महीने के रिकॉर्ड समय में तैयार किया.

नासा का मैवेन पहले पहुंचा
भारत के पहले मंगलयान से 48 घंटे पहले नासा का 'मैवेन' ने मंगल की कक्षा में प्रवेश किया. 'मैवेन' लाल ग्रह यानी मंगल के वातावरण का अध्ययन करेगा. 'मैवेन' से मिलने वाले आँकड़ों से वैज्ञानिकों को मंगल के वर्तमान और अतीत के वातावरण की परिस्थितियों का बेहतर मॉडल विकसित करने में मदद मिलेगी.

मंगलयान के महानायक

के. राधाकृष्णन -
इसरो के चेयरमैन और स्पेस डिपार्टमेंट के सेक्रेट्री के पद पर कार्यरत हैं. इस मिशन का नेतृत्व इन्हीं के पास है और इसरो की हर एक एक्टिविटी की जिम्मेदारी इन्हीं के पास है.

एम. अन्नादुरई - इस मिशन के प्रोग्राम के डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं. इन्होंने इसरो 1982 में ज्वाइन किया था और कई प्रोजेक्टों का नेतृत्व किया है. इनके पास बजट मैनेजमेंट, शैड्यूल और संसाधनों की जिम्मेदारी है. ये चंद्रयान-1 के प्रोजेक्ट डायरेक्ट भी रहे हैं.

एस. रामाकृष्णन - विक्रमसाराबाई स्पेस सेंटर के डायरेक्टर हैं और लॉन्च अथोरिजन बोर्ड के सदस्य हैं. उन्होंने 1972 में इसरो ज्वाइन किया था और और पीएसएलवी को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

एसके शिवकुमार - इसरो सैटेलाइट सेंटर के डायरेक्टर हैं. इन्होंने 1976 में इसरो ज्वाइन किया था और इनका कई भारतीय सैटेलाइट मिशनों में योगदान रहा है.

इनके अलावा पी. उन्नीकृष्णन, चंद्रराथन, एएस किरण कुमार, एमवाईएस प्रसाद, एस अरूणन, बी जयाकुमार, एमएस पन्नीरसेल्वम, वी केशव राजू, वी कोटेश्वर राव का भी इस मिशन में अहम योगदान रहा.

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