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शुक्रवार, 5 मार्च 2010

एक दुखभरी प्रेम कहानी और हैबिटेट जोन

महान योद्धा और उससे भी बड़ा प्रेमी मार्स और उसकी अमर प्रेमिका वीनस लंबे वक्त बाद एकबार फिर आसमान पर हैं। लेकिन जुपिटर के श्राप का असर अब भी है, इसीलिए ये दोनों अबभी मिलन के लिए तरस रहे हैं, वीनस सूरज डूबने के बाद आसमान में आकर मार्स की राह देखती है...लेकिन मार्स तब आता है, जब अंधेरा घिर आता है, और तब तक वीनस निराश होकर जा चुकी होती है।
ये अनोखा संयोग है कि आजकल आसमान में मंगल और शुक्र दोनों ही ग्रह नजर आ रहे हैं और देर रात हमारा-जाना पहचाना चंद्रमा भी दमकता नजर आ जाता है। शुक्र, पृथ्वी, चंद्रमा और मंगल इनमें एक ऐसी चीज है जो इन चारों में हर जगह मौजूद है...और वो है हमारा जाना-पहचाना पानी। शुक्र के बादलों में पानी भाप के रूप में मौजूद है, तो वहीं पृथ्वी पर बर्फ, महासागर और भाप तीनों ही रूपों में, चंद्रमा तो पूरी तरह पानी-पानी है, लेकिन यहां ज्यादातर पानी बर्फ के रूप में है, हाल ही में चंद्रयान के आंकड़ो के विश्लेषण से पता चला कि दक्षिणी ध्रुव की तरह चंद्रमा का उत्तरी ध्रुव भी पानी की बर्फ से भरा हुआ है। चंद्रमा पर भाप भी है, लेकिन लगभग न के बराबर। धरती और चंद्रमा से आगे बढ़े तो मंगल से मुलाकात होती है। और मंगल पर पानी बर्फ, तरल और भाप तीनों ही रूपों में मौजूद है। मंगल पर बर्फ के रूप में पानी का अथाह भंडार जमीन के नीचे दबा हुआ है, तो वहीं मंगल के वायुमंडल में पानी भाप के रूप में मौजूद है, जो रात की ठंड में कंडेंस यानि सघन होकर सुबह-सुबह ओस की लाखों-करोड़ों बूंदों की शक्ल में मंगल की मिट्टी और चट्टानों पर बिछा नजर आता है...और जैसे ही सूरज की पहली किरण इस ओस की चादर को छूती है, सारी ओस भाप बनकर वायुमंडल में समा जाती है।
मैंने बात शुरू की थी कि आजकल हमें शुक्र, और मंगल दोनों ही ग्रह नजर आ रहे हैं, और वो भी बिना किसी टेलिस्कोप की मदद से। शुक्र ग्रह की तो लंबे वक्त बाद शाम के आसमान पर वापसी हुई है। सूरज डूबने के फौरन बाद पश्चिम दिशा की लाली में एक चमकते हुए सितारे के रूप में आप शुक्र ग्रह को आसानी से देख सकते हैं। रात घिरते ही अपने सिर के ठीक ऊपर की ओर देखें, वहां एक सुनहरे सितारे के रूप में मंगल ग्रह भी दमकता हुआ नजर आ जाएगा।
शुक्र, पृथ्वी और मंगल आपस में एक खास रिश्ते की डोर से बंधे हुए हैं, और ये रिश्ता है जिंदगी का। जी हां, किसी भी सौरमंडल में जिंदगी वहां के एक खास इलाके में ही फलती-फूलती है, वो इलाका उस सौरमंडल के सूरज के आसपास ही होता है और इसे हैबिटेट जोन कहते हैं। हमारे सौरमंडल में ये हैबिटेट जोन शुक्र ग्रह से शुरू होता है और पृथ्वी को छूते हुए ये मंगल ग्रह तक जाता है। हमारे सौरमंडल में जिंदगी की मौजूदगी की सबसे आदर्श जगह भी यही हैबिटेट जोन ही है। पृथ्वी इस जोन के बीचोबीच में है, यही वजह है कि जीवन के फलने-फूलने की सबसे आदर्श स्थितियां और माहौल भी यहीं है। आजकल शाम होते ही हमें अपने सौरमंडल का ये हैबिटेट जोन आंखों के सामने नजर आने लगता है जो शुक्र से शुरू हो कर मंगल ग्रह तक जाता है, और आप इसके बीचोंबीच मौजूद होते हैं। आसमान के थिएटर पर एक शो चल रहा है, वीनस और मार्स की दुखभरी प्रेम कहानी का, एक-दूसरे का इंतजार करते मार्स और वीनस को क्या आप देखना नहीं चाहेंगे।
संदीप निगम

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