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शुक्रवार, 31 दिसंबर 2010

2011 कुछ नई चुनौतियां और आंकलन

जीएसएलवी की असफल लांचिंग ने इसरो की उस शानदार कामयाबी को फीका कर दिया जो यूरोपियन स्पेस एजेंसी के लिए मिशन हायलास-1 से जुड़ी थी। मिशन हायलास-1 यूरोपियन स्पेस एजेंसी का ऐसा पहला सेटेलाइट था जिसे इसरो के वैज्ञानिको ने पूरी तरह बैंगलोर में बनाया था। इससे पहले हम नासा और यूरोपियन स्पेस एजेंसी को उपकरणों और सॉफ्टवेयर्स की आपूर्ति करते रहे हैं, लेकिन हायलास-1 ऐसा पहला यूरोपियन सेटेलाइट था जिसे भारत में बनाकर यूरोप भेजा गया। देश की टेक्नोलॉजी आगे बढ़ रही है और दुनिया का भरोसा भी जीत रही है, मैं इसे साल 2010 की बड़ी उपलब्धि मानता हूं। 2010 को पीछे छोड़कर हम अब 2011 में प्रवेश कर चुके हैं और कई नई चुनौतियां सामने हैं। बीती बातों का जिक्र कर वाहवाही करने के बजाय सामने खड़ी चुनौतियों को समझना और 2011 में कौन सी महत्वपूर्ण उपलब्धियां मिलने वाली हैं इन्हें समझना ज्यादा जरूरी है।
2011 की दहलीज से हमें एक ब्रेकिंग न्यूज नजर आ रही है कि पृथ्वी से मिलता-जुलता एक ऐसा ग्रह ढूंढ़ लिया गया है जहां हम रह सकते हैं, इस बात की संभावना भी बहुत ज्यादा है कि 2011 का जिक्र इतिहास में एसे साल के तौर पर किया जाए...जब हमने धरती से दूर किसी ग्रह या चंद्रमा पर जीवन का एक अनजाना स्वरूप खोज निकाला। अपनी धरती और मानव सभ्यता की बात करें तो 2010 पर्सनल रोबोट, वर्चुअल वर्ल्ड, वर्चुअल सोसाइटी और वर्चुअल रिलेशन का हो सकता है। पैसा दो और अंतरिक्ष की सैर पर जाओ एक आम बात हो जाएगी और इस बात की भी पूरी उम्मीद है कि हम पेट्रोल और दूसरे जैविक ईंधनों पर अपनी निर्भरता नियंत्रित करने में कामयाब रहेंगे। प्रयोगशाला में हम जीवन का निर्माण कर चुके हैं और इस साल हम लैब में जीवन के कुछ बहुकोशकीय जटिल स्वरूप बनाने की कोशिश कर सकते हैं। मुझे लगता है कि दूसरी धरती की खोज, किसी और ग्रह पर जीवन की तलाश और प्रयोगशाला में बनाए जा रहे जीव, ये तीन घटनाएं आने वाले साल या इसके बाद मानव समाज और इसके विश्वास को झकझोरकर रख देने वाली साबित होंगी। मुमकिन है कि हमें युगों पुराने विश्वासों के टूटने से पैदा होने वाले सामाजिक नतीजों का सामना भी करना पड़े। 2011 स्पेस शटल उड़ानो का अंतिम साल होगा, अंतरिक्ष अभियानों, अंतरिक्षयात्रियों, हम भारतीयों और खुद नासा के लिए शटल रिटायरमेंट का पल काफी भावुक होगा।

साइंटोमेट्रिक्स की गणनाएं

बोस्टन के हावर्ड मेडिकल स्कूल के वैज्ञानिक डॉ. सैमुअल आर्बेसमैन सामाजिक वैज्ञानिक विकास के अध्ययन और इसके अगले कदम के आंकलन के लिए गणित और कंप्यूटर की मदद से खास रिसर्च कर रहे हैं। उन्होंने वैज्ञानिक विकास के अगले कदम के आंकलन के लिए गणना का अनोखा तरीका खोजा है और वो इसे ‘साइंटोमेट्रिक्स’ के नाम से पुकारते हैं। ‘साइंटोमेट्रिक्स’ की गणनाओं से डॉ. आर्बेसमैन ये बता सकते हैं कि कौन सी वैज्ञानिक खोज कब होने वाली है। पिछले साल सितंबर खोजे जा चुके नए ग्रहों की प्रकृति के डेटा की मदद से उन्होंने बताया था कि इस बात की 50 फीसदी संभावना है कि जीवन को सहारा देने वाला धरती से मिलता-जुलता पहला ग्रह मई 2011 तक खोज लिया जाए। जबकि ऐसे ग्रह की खोज वक्त से पहले यानि अक्टूबर के अंतिम हफ्ते तक ही कर ली गई। डॉ. आर्बेसमैन ने अपने इसी तरीके का इस्तेमाल कर 2011 के लिए ये वैज्ञानिक आंकलन किए हैं।

जुड़वां धरती की खोज संभव

डॉ. आर्बेसमैन की ‘साइंटोमेट्रिक्स’ बताती है कि हमारी धरती के जुड़वां की तलाश मई 2011 तक वो ब्रेकिंग न्यूज दे सकती है, जिसकी सभी इंतजार कर रहे हैं। अक्टूबर 2010 में ही ‘ग्लीसे-581 जी’ की खोज होने की खबर आ गई। हमसे 20.5 प्रकाश वर्ष दूर मौजूद एक रेड ड्वार्फ सितारे ग्लीसे-581 के सौरपरिवार में बी, सी, डी और ई नाम के ग्रह पहले ही खोजे जा चुके थे। लेकिन अक्टूबर में वैज्ञानिकों ने इस सौरपरिवार में मौजूद एक और ग्रह ‘जी’ की खोज कर ली। ‘जी’ यानि ‘ग्लीसे-581 जी’ अपने सितारे के हैबिटेट जोन में उसी तरह मौजूद है जैसे कि हमारे सौरमंडल में अपने सूरज से दूर हमारी पृथ्वी। लेकिन इस खोज की पुष्टि अभी दुनिया के दूसरे वैज्ञानिक केंद्रों और ऑब्जरवेटरीज से होनी बाकी है।
फरवरी 2011 इस सिलसिले में काफी अहम साबित होगा। इस महीने अंतरिक्ष में पृथ्वी की जुड़वां की तलाश में जुटे नासा की स्पेस ऑब्जरवेटरी केप्लर के डेटा रिलीज किए जाएंगे। सारी दुनिया के वैज्ञानिक और एस्ट्रोनॉमर्स फरवरी 2011 का इंतजार कर रहे हैं, जब एक नई दुनिया की खोज का ऐलान किया जा सकता है और अगर ये खोज न भी हो, तो भी उम्मीद है कि नए ग्रहों की संख्या कई गुना तक बढ़ सकती है।

इंटरनेट हंगामे का साल

2011 इंटरनेट हंगामे का साल होगा। फिनलैंड, स्पेन और एस्टोनिया में इंटरनेट को इतना महत्वपूर्ण समझा जाता है कि यहां इसके एक्सेस को कानूनी अधिकार में शामिल कर लिया गया है। यानि इन देशों में इंटरनेट का इस्तेमाल हर नागरिक का कानूनी अधिकार है। एप्पल आईपैड और टचस्क्रीन कंप्यूटर्स के आगमन ने वेब सर्फिंग को और भी मजेदार और इंटरैक्टिव बना डाला है, जबकि बाजार में मौजूद स्मार्टफोन्स, खासतौर पर एन्ड्रॉएड्स ने मोबाइल पर इंटरनेट को बेहद आसान कर दिया है। लेकिन इन सब के बावजूद विकासशील देशों में केवल 20 फीसदी जनसंख्या ही इंटरनेट का इस्तेमाल कर रही है। मोबाइल पर इंटरनेट का प्रयोग करने वालों की तादाद तो और भी कम है। 2011 में हम सभी एक इंटरनेट क्रांति देखेंगे। जिससे वर्चुअल सोसाइटी और वर्चुअल रिश्तों की शुरुआत होगी।

सड़कों पर दौड़ेंगी इलेक्ट्रिक कारें

लंबा इंतजार अब खत्म होगा और 2011 में हम सड़कों पर दौड़ती इलेक्ट्रिक कारें देख सकेंगे। लंबे टेस्ट का बाद अब मोबाइल की तरह चार्ज की जा सकने वाली कारें वाकई लांच के लिए तैयार हैं।
 ऐसी इलेक्ट्रिक कारें कई कंपनियां बना रही हैं, लेकिन इस सेगमेंट की लीडर कंपनी है शेवी वोल्ट... 16 किलोवॉट-घंटे की बैटरी और 149 हॉर्स पावर वाली इलेक्ट्रिक मोटर के साथ जिसकी कारें अब सड़कों पर दौड़ने के लिए तैयार हैं।
शेवी की कार एक बार चार्ज हो जाने के बाद 60 किलोमीटर तक दौड़ सकती है। आपात स्थिति का सामना करने के लिए इसमें पेट्रोल इंजन भी लगा हुआ है।

मानवता की उम्मीद- स्टेम सेल

अविकसित मानव भ्रूण से निकाले गए स्टेम सेल्स ने चिकित्साजगत में नई आशाएं जगाई हैं। 2010 में स्टेम सेल के दो अहम प्रयोगों की शुरुआत हुई, उम्मीद है जिनके सुखद नतीजे हमें 2011 में प्राप्त होंगे। अविकसित मानव भ्रूण से निकाले गए स्टेम सेल्स में एक खास गुण होता है कि वो हमारे शरीर में मौजूद 200 तरह के सभी ऊतकों को फिरसे उत्पन्न कर सकते हैं। यानि आम भाषा में कहें तो स्टेम सेल हमारे शरीर के किसी भी अंग को फिर से पैदा कर सकते हैं। लेकिन क्योंकि ये स्टेम सेल एक अविकसित भ्रूण से निकाला जाता है, जो इस प्रक्रिया में नष्ट हो जाता है, इसलिए इस तकनीक के इस्तेमाल पर नैतिक विवाद है। अगर 2010 में शुरू किए गए स्टेम सेल के ये दोनों अहम प्रयोग अपनी उम्मीदों पर खरे उतरते हैं, तो इस तकनीक के इस्तेमाल को लेकर विवाद खुद-ब-खुद खत्म हो जाएगा।
मैसाचुसेट्स के वॉरसेस्टर में मौजूद एडवांस्ड सेल टेक्नोलॉजी के डॉ. रॉबर्ट लांजा बताते हैं कि स्टेम सेल के पहले प्रयोग के तौर पर हमने एक नेत्रहीन व्यक्ति की आंख में ‘रेटिनल सेल्स’ इंजेक्ट कर दिए हैं। आंख की रोशनी खो चुके कई रोगियों पर 2011 में ये प्रयोग दोहराया जाएगा, उम्मीद है कि कुछ ही हफ्तों बाद इसके नतीजे सामने आ जाएंगे। इस तकनीक से रोगियों को फिर से आंख मिलने में कम से कम छह हफ्तों का वक्त लगेगा।
अक्टूबर 2010 में स्टेम सेल का एक और अहम प्रयोग किया गया, एक ऐसे रोगी की रीढ़ की हड्डी में स्टेम सेल्स प्रत्यारोपित किए गए जो एक दुर्घटना में स्पाइनल इंजरी का शिकार हो कर पैरालाइज हो गया था। उम्मीद है कि उसकी रीढ़ में प्रत्यारोपित किए गए स्टेम सेल्स क्षतिग्रस्त नर्व की जगह नई नर्व्स उत्पन्न कर देंगे, जिससे वो रोगी फिरसे चलने-फिरने लगेगा।

निजी स्पेस टैक्सी

स्पेस टूरिज्म का दौर इधर कुछ थमा सा नजर आ रहा है। निजी कंपनियां कई साल से वादा कर रही हैं कि वो अंतरिक्ष के सफर को सरकारी नियंत्रण से आजाद करके इतना सस्ता कर देंगी कि आम लोग भी अंतरिक्षयात्रा पर जा सकेंगे। 2011 में हम इस सपने को सच होता देखेंगे। 8 दिसंबर को इसका पहला प्रयोग कामयाब रहा, कैलीफोर्निया की कंपनी स्पेस-एक्स ने अपना ड्रैगन कैप्सूल सफलता के साथ धरती की कक्षा तक भेजा और उतनी ही कुशलता से उसे धरती पर वापस ले आया गया। पहली बार एक निजी कंपनी ये करने में कामयाब रही। 2008 में नासा के साथ किए गए एक अनुबंध के तहत स्पेस-एक्स की उड़ान इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए माल ढोने का काम करेगी, लेकिन उड़ान में इस स्पेसक्राफ्ट के भीतर कंपनी के भेजे अंतरिक्षयात्री भी मौजूद रहेंगे।
नासा के ऐतिहासिक स्पेस शटल का बेड़ा 2011 में रिटायर हो रहा है। हकीकत में स्पेस शटल के इस घोषित रिटायरमेंट से ही स्पेस टैक्सीज को विकसित करने के लिए निजी कंपनियों का रास्ता साफ हुआ है। खास बात ये कि स्पेस टैक्सी को विकसित करने के लिए नासा और अमेरिकी कांग्रेस निजी कंपनियों को वित्तीय मदद भी दे रहे हैं। 2011 में स्पेस-एक्स की दो परीक्षण उड़ानें और होनी हैं और 2011 में ही स्पेस-एक्स पहली बार स्पेस स्टेशन से डॉक भी करेगा। स्पेस टूरिज्म कंपनी वर्जिन गैलेक्टिक भी 2011 में एक जाइंट लीप भरने के लिए तैयार है।

2011 की मुख्य खगोलीय घटनाएं और स्पेस मिशन लांच


2 जनवरी - बृहस्पति और यूरेनस का उत्तर दिशा में 13:41 UTC बजे कंजक्शन, आमतौर पर 13 साल में एक बार होने वाली ये खगोलीय घटना बीते 10 महीने के दौरान तीसरी बार घट रही है
4 जनवरी - आंशिक सूर्य ग्रहण, यूरोप, अरब देशों, उत्तरी अफ्रीका और पश्चिमी एशिया में दिखेगा



3 फरवरी - स्पेस शटल डिस्कवरी मिशन एसटीएस-133 लांच, Lunch Time-1:37 am EDT


18 मार्च - नासा का मैसेंजर स्पेसक्राफ्ट पहली बार बुध की कक्षा में प्रवेश करेगा


18 मार्च - पांच साल पहले प्लूटो के सफर पर निकला नासा का मिशन न्यू होराइजन यूरेनस के परिक्रमा-पथ से होकर गुजरेगा। मिशन न्यू होराइजन की रफ्तार वॉयेजर-2 से कहीं ज्यादा तेज है। वॉयेजर-2 ने यहां तक पहुंचने में 8 साल का वक्त लिया था।

01 अप्रैल – नासा के ऐतिहासिक स्पेस शटल की अंतिम उड़ान। शटल एंडेवियर मिशन एसटीएस-134 अंतिम उड़ान भरेगा Launch Time 3:15 am EDT
मई - बृहस्पति, शुक्र, बुध और मंगल आसमान में एक छोटे से दायरे में एकसाथ नजर आएंगे। बेहद दुर्लभ खगोलीय घटना
01 जून – आंशिक सूर्य ग्रहण, आर्कटिक यानि उत्तरी ध्रुवीय इलाकों से दिखेगा
15 जून – पूर्ण चंद्र ग्रहण, मुख्य तौर पर अफ्रीका, भारत और मध्य-पूर्वी देशों से नजर आएगा
01 जुलाई – आंशिक सूर्य ग्रहण अंटार्कटिक यानि दक्षिणी ध्रुव के तटीय इलाकों से नजर आएगा
10 जुलाई – 1846 में खोजे जाने के बाद नेप्च्यून सूरज की पहली परिक्रमा पूरी करेगा
जुलाई - स्पेसक्राफ्ट डॉन छुद्र ग्रह वेस्टा जा पहुंचेगा
15 जुलाई - निजी स्पेस टैक्सी स्पेस-एक्स के ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट की दूसरी परीक्षण उड़ान। इस उड़ान में ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के 6 मील दूर तक जाएगा

05 अगस्त – सौरमंडल के सबसे विशाल ग्रह बृहस्पति के लिए पहला साइंस मिशन रवाना होगा। नासा का जूनो स्पेसक्राफ्ट बृहस्पति के सफर पर रवाना होगा, launch at 12:10 pm to 1:40 pm EDT. मिशन जूनो बृहस्पति तक 2016 में पहुंचेगा।
15 अगस्त – धूमकेतु 45P/Honda-Mrkos-Pajdusakova धरती के बेहद करीब यानि करीब 8,995,100 किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा
08 सितंबर – नासा का Gravity Recovery and Interior Laboratory (GRAIL) मिशन लांच at 8:35 am - 9:14 am EDT. मिशन ग्रेल में दो स्पेसक्राफ्ट होंगे जो चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश करके चंद्रमा की आंतरिक बनावट का अध्ययन करेंगे
08 अक्टूबर – निजी स्पेस टैक्सी स्पेस-एक्स के ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट की तीसरी और अंतिम परीक्षण उड़ान। इस उड़ान में ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के करीब जाकर उससे डॉक करेगा
25 नवंबर – आंशिक सूर्य ग्रहण अंटार्कटिक के इलाकों से नजर आएगा
25 नवंबर – मंगल पर जीवन की खोज के लिए नासा का महत्वपूर्ण रोवर मिशन मार्स साइंस लैबोरेटरी मंगल के सफर पर निकलेगा। फ्लोरिडा के केप कैनेवेरल से मिशन लांच 10:21 am
07 दिसंबर – निजी स्पेस टैक्सी स्पेस-एक्स के ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट की चौथी उड़ान। इस उड़ान में ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए सप्लाई ले जाएगा
10 दिसंबर – साल का दूसरा पूर्ण चंद्र ग्रहण, एशिया, ऑस्ट्रेलिया और अलास्का से नजर आएगा
25 दिसंबर – मंगल के चंद्रमा फोबे के लिए रूस का महत्वपूर्ण मिशन फोबे-ग्रुंट लांच होगा। इस मिशन में चीन भी सहयोग कर रहा है। मिशन फोबे-ग्रुंट 2012 में मंगल के चंद्रमा फोबे पर उतरकर वहां से मिट्टी के सैंपल लेकर धरती पर वापस भेजेगा।

- सूरज से सौर विकिरण का एक बड़ा तूफान उठने का आशंका है
- पाकिस्तान अपना पहला स्पेस सेटेलाइट लांच करेगा
- चीन अपने स्पेस स्टेशन पर काम शुरू करेगा। शुरुआत अंतरिक्ष में एक प्रयोगशाला भेजने से

2 टिप्‍पणियां:

  1. संदीप जी ,
    बेहद उपयोगी जानकारी दी आपने। अच्छा लगा आपके ब्लॉग पर आकर। आप विज्ञान को समर्पित एक नेक कार्य में संलग्न हैं। आपके लिए मेरी शुभकामनायें।

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  2. बहुत शानदार जानकारियां, उतनी ही रोचक भी.
    स्टेम सेल के बारे में खबर आई है कि जो प्रयोग २०१० में एक रोगी पर हुआ, अब अमेरिकी सरकार ने एक ज़्यादा व्यापक बीमारी मैकुलर डिजनरेशन के ज़्यादा बडे रोगी समूह पर स्टेम सेल प्रयोग की अनुमति दे दी है. यह रोग बुज़ुर्गों में अंधेपन का सबसे बडा कारण है, खासतौर पर पश्चिमी देशों में.
    इसके परिणामों पर नज़र रखें. यह अनुमति क्रांतिकारी साबित हो सकती है.
    शुभकामनाएं
    - विवेक गुप्ता

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