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मंगलवार, 30 अगस्त 2011

सप्तऋषि का ‘8वां सितारा’


सुपरनोवा नजर आने की दुर्लभ घटना
हम जल्दी ही एक अदभुत खगोलीय घटना के साक्षी बनने जा रहे हैं। दूर अंतरिक्ष में सुपरनोवा धमाके के साथ एक सितारे की मौत हुई है और इस जबरदस्त धमाके से निकली ऊर्जा की चमक अब हम तक पहुंच रही है। हमारे जाने-पहचाने सप्तऋषि तारामंडल में जल्दी ही आठवें ऋषि यानि एक और चमकीले सितारे के दर्शन होने जा रहे हैं। ये चमकीला सितारा यानि सप्तऋषि का आठवां ऋषि यही सुपरनोवा होगा।
किसी सुपरनोवा के नजर आने की घटना बेहद दुर्लभ है और 24 साल यानि एस्ट्रोनॉमर्स की पूरी एक पीढ़ी के बाद अब ये मौका आया है जब हम सुपरनोवा धमाके को धरती से देख सकेंगे। ये सुपरनोवा हमारी पृथ्वी से 2 करोड़ 10 लाख प्रकाशवर्ष दूर है, लेकिन अगर इस दूरी को मानक सीमा मानते हुए एक काल्पनिक गोल दायरा खींचें तो बीते 40 साल में सुपरनोवा जैसी घटना इस दायरे में नहीं हुई थी। इस दायरे में सुपरनोवा की घटना पहली बार हुई है। हमारी आकाशगंगा मिल्की-वे में 1604 के बाद से अब तक कोई सुपरनोवा विस्फोट नहीं हुआ है। हमारी आकाशगंगा में 1604 में हुए सुपरनोवा विस्फोट के बारे में रिकार्डों में दर्ज है आसमान में चमकते एक सितारे के रूप में इसकी तेज चमक दिन में भी दिखाई देती रही थी।
अंतरिक्ष में सबसे चमकीला और सबसे शक्तिशाली ऊर्जा का विस्फोट है सुपरनोवा। सुपरनोवा घटना की मदद से ही वैज्ञानिक ब्रह्मांड के लगातार फैलाव का अध्ययन करते हैं। कैलीफोर्निया में माउंट पालोमर ऑब्जरवेटरी के स्वनियंत्रित स्काई सर्वे पालोमर ट्रांसिएंट फैक्ट्री (PTF) पर काम करने वाले एस्ट्रोनॉमर्स 2 करोड़ 10 लाख प्रकाशवर्ष दूर पिनव्हील गैलेक्सी (M101) का सर्वे कर रहे थे, कि तभी उन्होंने यहां सुपरनोवा की इस दुर्लभ घटना को अपनी आंखों से घटते हुए देखा और इसे रिकार्ड कर लिया। सुपरनोवा को इससे पहले कभी उसके ऐन घटते वक्त रिकार्ड नहीं किया गया था।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एस्ट्रोनॉमी प्रोफेसर और पालोमर ट्रांसिएंट फैक्ट्री के कोलेब्रेटर मार्क सुलिवान कहते हैं, सुपरनोवा जैसी घटना को इतने करीब घटते देखकर हम बेहद रोमांचित हैं। सबसे अनोखी बात ये है कि सुपरनोवा विस्फोट हमने आंखों के सामने घटते देखा है।
आने वाले दिनों में हवाई की मौना केया जैसी ग्राउंड और हब्बल जैसी स्पेस ऑब्जरवेटरीज इस सुपरनोवा का गहराई से अध्ययन करेंगी। कैलीफोर्निया बर्कले की लॉरेंस बर्कले नेशनल लैबोरेटरी के पीटर नुगेंट कहते हैं,अब तक देखा गया IA श्रेणी का ये सबसे शानदार सुपरनोवा है, जो अब भी विस्फोट और फैलाव की प्रक्रिया में है। यही वजह है कि ये सुपरनोवा हर घंटे बदल रहा है और इसके ऑब्जरवेशन और अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों में होड़ सी लग गई है।
आमतौर पर सुपरनोवा यानी जबरदस्त धमाके के साथ सितारे की मौत की घटना तब घटती है जब सितारे का केंद्र या कोर कोलैप्स कर जाती है। लेकिन सितारों में IA श्रेणी का सुपरनोवा विस्फोट तब होता है, जब व्हाइट ड्वार्फ सितारे में सैद्धांतिक सीमा से कई गुना ज्यादा द्रव्यमान इस कदर इकट्ठा हो जाता है जिसे सितारा संभाल नहीं पाता और थर्मोन्यूक्लियर डेटोनेशन की प्रक्रिया शुरू होकर सुपरनोवा के जबरदस्त धमाके को जन्म दे देती है। साइंस के लिए ये घटनाएं बेहद महत्वपूर्ण होती हैं, क्योंकि इनकी मदद से वैज्ञानिक दो आकाशगंगाओं के बीच की दूरी की गणना करते हैं और पुराने डेटा से तुलना करके ये पता लगाते हैं कि क्या आकाशगंगाओं के बीच की दूरी उतनी ही है, या फिर इसमें कोई बदलाव आया है। आकाशगंगाओं के बीच की दूरी में आया बदलाव ये बताता है कि ब्रह्मांड के फैलने की रफ्तार क्या है। 
दूर-दराज की आकाशगंगाओं में हुए IA श्रेणी के सुपरनोवा धमाके के अध्ययन से 1998 में एक चौंकाने वाली बात सामने आई। वैज्ञानिकों ने पता लगाया कि बह्मांड के फैलने की रफ्तार लगातार बढ़ रही है, और इसकी वजह है डार्क इनर्जी की मौजूदगी है। इसके बाद के अध्ययनों से हमें पता चला कि हमारे ब्रह्मांड का मौजूदा आकार डार्क इनर्जी ने ही गढ़ा है।  
सुपरनोवा धमाके के साथ फूटने वाली चमक के स्पेक्टोग्राफी अध्ययन से उस सितारे में मौजूद धातुओं की जानकारी भी मिलती है। सीधा सा नियम ये है कि जिस सितारे में जितना ज्यादा धातुएं मौजूद होंगीं उसके सुपरनोवा में उतनी ही तेज चमक होगी।  
प्रोफेसर मार्क सुलिवान बताते हैं कि सितंबर के पहले हफ्ते तक इस सुपरनोवा की चमक इतनी ज्यादा बढ़ जाएगी कि ये 9 से 10 विजुअल मैग्नीट्यूट वाले सितारे जैसा नजर आने लगेगा। आसमान में इस अनोखे सुपरनोवा को देखने के लिए उर्सा मेजर या बिग डिपर कांस्टलेशन को खोजिए। हम भारतीय इसे सप्तऋषि तारामंडल के नाम से जानते हैं। इस तारामंडल की पूंछ या हैंडल के करीब मौजूद 7 वें सितारे से थोड़ा ऊपर की ओर देखिए, यहीं मौजूद है पिनहोल गैलेक्सी (M101) और अगर आप शहर की जगमगाहट से दूर हैं तो शायद यहीं आपको एक सितारा जगमगाता नजर आ जाएगा, जो असल में कोई सितारा नहीं, बल्कि IA श्रेणी का सुपरनोवा है। अगर आपके पास शक्तिशाली दूरबीन या फिर कोई साधारण टेलिस्कोप है तो सुपरनोवा का ये नजारा और भी खूबसूरत नजर आएगा। 

4 टिप्‍पणियां:

  1. सार्थक जानकारी. भीड़ से अलग है प्रयास आपका. शुभकामनाएं.

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  2. क्या यह दिखना शुरू हो गया है -क्या नाम हम रखेगें इसका ..क्यों न अन्ना रख दिया जाय

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  3. अरविन्द जी की बात ही दुहरा ली जाय।

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  4. arvind ji ki bat sahi hai, lakin Annaji ek tootne wala tara nahi hain, balki jagmagate tara hain.

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