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बुधवार, 31 अगस्त 2011

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन मुसीबत में


अंतरिक्ष में लगभग चार सौ किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी की अग्रिम चौकी की तरह काम कर रहे इंटरनैशनल स्पेस स्टेशन के अस्तित्व पर अचानक गंभीर खतरा मंडराने लगा है। मौजूदा सदी के करीब ग्यारह वर्षों में लगातार इस पर कुछ न कुछ अंतरिक्ष यात्री मौजूद रहे हैं, लेकिन आने वाले दिनों में यह सिलसिला शायद कायम न रह पाए। स्पेस स्टेशन और धरती के बीच नियमित आवाजाही की व्यवस्था नासा की जिस शटल सेवा पर टिकी थी, उसे अमेरिकी सरकार के एक फैसले के तहत समाप्त किया जा चुका है। शटल की अनुपस्थिति में इंटरनैशनल स्पेस स्टेशन धरती से संपर्क के लिए पूरी तरह से रूस के सोयुज यानों पर निर्भर करता है। लेकिन रूसी अंतरिक्ष कार्यक्रम में इधर मात्र एक हफ्ते में हुई दो दुर्घटनाओं ने इस भरोसे को छिन्न-भिन्न कर दिया। सोयुज के प्रक्षेपण के लिए रूस जिन नए रॉकेटों का इस्तेमाल करने जा रहा था, उन्होंने पिछले 18 अगस्त और 24 अगस्त को दगा दे दिया और दो बहुत महंगे व महत्वपूर्ण प्रक्षेपणों को धूल में मिला दिया। ऐसे में रूस ने इन रॉकेटों की गड़बड़ियों को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हुए बगैर कोई और प्रक्षेपण न करने की घोषणा कर दी है।
स्पेस स्टेशन पर फिलहाल कुल छह अंतरिक्ष यात्री मौजूद हैं और अगले दो महीनों के लिए उनके पास रसद-पानी भी है। वहां से धरती पर उनकी वापसी में भी कोई बड़ी समस्या नहीं है, क्योंकि इमर्जेंसी के लिए स्पेस स्टेशन पर दो सोयुज यान हमेशा तैयार रखे जाते हैं। असल मुश्किल यह है कि स्टेशन को बिल्कुल खाली रखने पर इसे एक-दो महीने से ज्यादा समय तक बचाए रखना संभव नहीं हो पाएगा।
शीतयुद्ध के बाद की एकीकृत दुनिया के प्रतीक के रूप में सोलह देशों के संयुक्त प्रयास से करीब डेढ़ दशक में तैयार हुआ इंटरनैशनल स्पेस स्टेशन किसी फुटबॉल फील्ड जितना लंबा-चौड़ा और कुतुब मीनार से भी ज्यादा ऊंचा है। किसी भरी हुई मालगाड़ी जितने वजन वाला यह विराट ढांचा जमीन से सैकड़ों किलोमीटर दूर बिल्कुल अधर में 18 हजार मील प्रति घंटे की रफ्तार से घूम रहा है। इस स्पेस स्टेशन में लगातार चलने वाले शोधकार्यों ने विज्ञान की लगभग सभी शाखाओं को समृद्ध किया है।
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टिप्पणियों के लिए धन्यवाद,  मौका मिलने के बावजूद भारत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का निर्माण और संचालन करने वाले 16 सदस्य देशों के ग्रुप में शामिल नहीं हो सका । माधवन नायर जब इसरो के प्रमुख थे तब स्पेस स्टेशन के अभियान में भारत के भी शामिल होने की बात चल रही थी। सब कुछ ठीक था और भारत को स्पेस स्टेशन में भागीदारी करने वाले 16 वें और अकेले एशियाई देश होने का गौरव मिलने ही वाला था कि तभी अज्ञात कारणों से हम ये सम्मान नहीं पा सके - संपादक

3 टिप्‍पणियां:

  1. सोलह देशों में भारत था या नहीं, बताइएगा।

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  2. अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए क्षति होगी ऐसा होना.

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  3. भारत के हाथ से यह गौरव छिन जाने का मलाल मुझे आज भी है -मगर गलती हमारी ही है !

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