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शनिवार, 3 दिसंबर 2011

2012 से नहीं, अज्ञान से डरिए – डॉ. क्रुप


2011 बीतने को है, इसी के साथ 2012 को लेकर लोगों के मन में आशंकाओं का गुबार भी उठ रहा है। पूरी जोरदारी के साथ वॉयेजर 2012 के संबंध में प्रचारित सभी आशंकाओं का खंडन करता है। लोगों को जागरूक करने के लिए हम 2012 पर एक विशेष सीरीज की शुरुआत कर चुके हैं। इसकी अगली कड़ी के तौर पर प्रस्तुत हैं 2012 से जुड़ी भ्रांतियों के संबंध में लॉस एंजेल्स की ग्रिफिथ ऑब्जरवेटरी के निदेशक डॉ.ई.सी.क्रुप के विचार उन्हीं के शब्दों में-
जैसे-जैसे 2011 के कैलेंडर की तारीख आगे बढ़ रही है, लोगों के बीच 2012 के डर का एक पुराना मजाक फिर से सुगबुगाने लगा है। आप किसी सेमिनार या वर्कशॉप में जाएं, जहां आम लोग और छात्र भी हों और उन्हें मालूम हो कि आप एक अंतरिक्ष वैज्ञानिक हैं तो सवाल-जवाब के सत्र में ये सवाल फिर से उछलने लगा है कि 2012 में क्या होगा? इस सवाल के जवाब से पहले आपको कुछ और भी जानना जरूरी है।
'विनाश' का जन्म
तबाही, बर्बादी और जान-माल का भारी नुकसान, हमें अब ऐसी शैतानी भविष्यवाणियों की आदत पड़ चुकी है। विनाश की इन भविष्यवाणियों में अजीब से डर का एक मनोरंजक रोमांच छिपा है, जो सुनने या पड़ने वाले को अपनी ओर खींचता है। 1 जनवरी 2000 भी ऐसी ही एक तारीख थी, जब दुनिया Y2K की अराजक आशंका से जूझ रही थी। मुझे ताज्जुब नहीं होगा अगर आप इसे भूल गए हों, Y2K एक कंप्यूटर वायरस था और दावे किए जा रहे थे कि ये नई शताब्दी की पहली तारीख 1 जनवरी 2000 को दुनियाभर के कंप्यूटर्स ऑपरेशनल सॉफ्टवेयर को बेकार कर देगा। मुझे तो याद नहीं कि फिर क्या हुआ था, क्या आपको याद है?  ऐसे लोगों की कोई कमी नहीं जो तबाही और बर्बादी की अफवाहें उड़ाने की लत के शिकार हैं, ये लोग लोगों का ध्यान खींचने के लिए अकसर 16 वीं सदी के फ्रेंच ज्योतिषी नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों का सहारा लेते हैं। लेखक चार्ल्स बर्लिट्ज ने 1981 में प्रकाशित अपनी किताब 'डूम्सडे 1999' में प्रलय की भविष्यवाणी की थी। इस किताब में उन्होंने 1999 में भीषण बाढ़, सूखे, प्रदूषण और धरती के चुंबकीय ध्रुवों के पलट जाने की भविष्यवाणी की थी। इतना ही नहीं उन्होंने 5 मई 2000 को ग्रहों के एक सीध में आ जाने, खतरनाक सौर तूफान उमड़ने, विनाशकारी भूकंपों, भौगोलिक परिवर्तनों और धरती में धमाके होने की भी भविष्यवाणियां की थीं। 21वीं सदी की शुरुआत से ऐन पहले भी ऐसी भविष्यवाणियों की बाढ़ आ गई थी, जिनमें नई सदी में भूकंपों, प्लेग के प्रकोप, ध्रुवों के परिवर्तन और अपनी जगह से खिसककर महाद्वीपों के समुद्र में समा जाने की बातें की गई थीं। 
लेकिन जब 1 जनवरी 2000 आई और बीत गई तो फिर विनाश के इन प्रचारकों ने तबाही की तारीख में एक नया बदलाव कर दिया, उन्होंने कहा कि पता चला है कि प्रलय अब कई महीने बाद 5 मई 2000 को आएगी। ये तारीख भी आई और गुजर गई। 1974 में जॉन ग्रिबिन और स्टीफेन प्लागेमन ने एक किताब लिखकर 10 मार्च 1982 को 'जुपिटर इफेक्ट' के चलते धरती पर तबाही और बर्बादी टूटने की भविष्यवाणी की थी। ग्रिफिन और प्लागेमन के इन ऊल-जुलूल दावों ने अखबारों की सुर्खियां तो बटोरीं, लेकिन हुआ कुछ भी नहीं। इतिहास के पन्ने ऐसे बेसिरपैर के दावों से भरे पड़े हैं। तबाही के भविष्यवक्ता हर बार गलत साबित होते हैं और हर बार वो एक नई तारीख एक नया बहाना गढ़ लेते हैं।
कैलेंडर के बदलते पन्ने
माया कैलेंडर में आखिर है क्या? कुछ लोग हैं जिनका दावा है कि ये कैलेंडर 21 दिसंबर 2012 को खत्म हो रहा है। हालांकि माया कैलेंडर के हिसाब से देखें तो ये हजार साल का अंत नहीं है, बल्कि इस तारीख को 'बक्तून-13' खत्म हो रहा है। माया कैलेंडर समय के कई चक्र पर आधारित है इन्हीं में से एक समय चक्र है 'बक्तून'...एक 'बक्तून' में 1,44,000 दिन होते हैं। आइए जानते हैं कि माया कैलेंडर और दुनिया के अंत की इस भविष्यवाणी की शुरुआत कैसे हुई?
1975 में रोमांटिक और काल्पनिक भविष्य की रूपरेखा रचने में माहिर लेखक फ्रैंक वाटर्स ने अपनी किताब मैक्सिको मिस्टीक में पहली बार माया सभ्यता के कैलेंडर का जिक्र किया। उन्होंने '13-बक्तून' के समयकाल को 'ग्रेट माया साइकिल' का नाम दिया और बढ़ाचढ़ा कर इसकी अवधि 5,200 साल की बताई। वाटर्स की गणना थी कि अब तक ऐसी 5 'ग्रेट माया टाइम साइकिल' बीत चुकी है और हर साइकिल का खात्मा दुनिया में भारी विनाश और पुनर्रचना के साथ हुआ। मजे की बात ये कि माया परंपरा के मूल कैलेंडर में ऐसी किसी विपदा या विनाश की कोई बात कहीं नहीं है। इतना ही नहीं वाटर्स ने उस तारीख को पहचानने में भी गलती की जब माया का कैलेंडर खत्म हो रहा था। वाटर्स के मुताबिर माया कैलेंडर 24 दिसंबर 2011 को खत्म हो रहा है और इस दिन ऐसा भीषण भूकंप आएगा कि पूरी दुनिया ही खत्म हो जाएगी। बस फिर क्या था, माया कैलेंडर की आड़ में तबाही और बर्बादी की बातें वाटर्स से शुरू होकर चल निकलीं...लोगों को मजा आने लगा और नए-नए किस्से जुड़ते चले गए।         
एक और किताब थी जिसने इस अफवाह को और भी फैलाया। 1975 में डेनिस और टेरेंस मैक्केना ने अपनी किताब 'द इनविजिबिल लैंडस्केप-माइंड, हैलुसिनोजन्स एंड द आई चिंग' में माया कैलेंडर के खत्म होने पर व्यापक चर्चा की। इस किताब में कम से कम पहली बार 'बक्तून-13' और माया कैलेंडर के खत्म होने की तारीख की सही गणना की गई, ये थी 21 दिसंबर 2012। ये तारीख कुछ और नहीं बल्कि 2012 के विंटर सोल्सटाइस का दिन है, जब सूरज गैलेक्टिक सेंटर से करीब 3 डिग्री धनु राशि में होगा और संयोग से इक्लिप्टिक लाइन से इसकी स्थिति 2 डिग्री की होगी। मैक्केना ने अपनी किताब में कहा कि इस दिन सूरज गैलेक्टिक सेंटर यानि आकाशगंगा के केंद्र पर ग्रहण की स्थिति बनाएगा। वास्तविकता में देखें तो ऐसी स्थिति कभी नहीं बनने वाली, लेकिन जब अफवाहों का बाजार गर्म हो, तब तथ्यों की परवाह कौन करे। 
 2012 के हिस्टीरिया की शुरुआत 1987 से हुई, जब जोश एरगुएल्स की किताब 'द मायन फैक्टर-पाथ बियांड टेक्नोलॉजी' बाजार में आई। मैक्केना की कल्पना को आगे बढ़ाते हुए जोश ने अपनी किताब में लिखा कि 21 दिसंबर 2012 को जब सूरज आकाशगंगा के केंद्र से ग्रहण की स्थिति बनाएगा तब आकाशगंगा के केंद्र से एक किरण सी फूटेगी। लेखक के मुताबिक माया लोग इस किरण के बारे में जानते थे और वो ये भी जानते थे कि धरती कब इस किरण में प्रवेश करेगी और कब इससे बाहर निकलेगी। जोश ने लिखा कि ये किरण एक अदृश्य आकाशगंगीय जीवन धागे की तरह काम करेगी और धरती के सभी लोगों, इस पूरे ग्रह और सूरज को आकाशगंगा के केंद्र से जोड़ देगी। तथ्यों की बात करें तो, इस अनोखी कल्पना का जिक्र न तो माया सभ्यता की परंपरा में कहीं है और न ही आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान ही ऐसी बेसिर-पैर की बातों का समर्थन करता है। 
 1987 में जोश एरगुएल्स और दुनियाभर में फैल चुके उनके समर्थकों ने भविष्यवाणी की कि उस साल 16-17 अगस्त को 'माया-आकाशगंगीय किरण का जीवन धागा' पूरी दुनिया पर छा जाएगा। इन लोगों ने दावा किया कि इस घटना का असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा और हजारों लोगों को धरती के 'एक्यूप्रेशर बिंदुओं' पर इकट्ठा होकर एक 'बायो-इलेक्ट्रोमैग्नेटिक बैटरी' का निर्माण करना चाहिए। लेकिन ये तारीख आई और शांति से गुजर गई और जोश-उनके समर्थकों के दिमागों को छोड़कर कहीं कुछ नहीं हुआ।

आकाशगंगा का खिलवाड़
आइए जल्दी से 1995 की बात करें, इस साल जॉन मेजर जेनकिन्स ने दुनिया के खात्मे औप प्रलय के तमाम दावों को माया कॉस्मोजेनेसिस 2012 के साथ जोड़ दिया। जेनकिन्स के मुताबिक 2012 के विंटर सोल्सटाइस के दिन सूरज आकाशगंगा के केंद्र के बिल्कुल एकसीध में आ जाएगा। जेनकिन्स का दावा था कि माया लोग इस घटना के बारे में जानते थे और इसीलिए इसकी तारीख बताने के लिए उन्होंने इस खास कैलेंडर का निर्माण किया।  
साइंस के नजरिए से देखें तो अंतरिक्ष विज्ञान में ऐसे आकाशगंगीय संयोग की गणना नहीं की जा सकती। हमारी आकाशगंगा मिल्की-वे का सटीक बाहरी सीमांकन संभव नहीं है। इसके अलावा सबसे बड़ा तथ्य ये है कि हमारी आकाशगंगा गोलाकार है और गोले के व्यास पर आप कहीं भी हों हर वक्त केंद्र के साथ एकसीध की स्थिति में ही रहेंगे। इस लिहाज से हमारा सूरज हरदिन हर पल आकाशगंगा के केंद्र के साथ एकसीध में ही रहता है। इस छोटे से तथ्य को इंटरनेट पर छाई 2012 की एक से बढ़कर एक तबाही की भविष्यवाणियों और उनके प्रणेताओं के साथ ही ज्यादातर लोग भी नहीं समझते। 2012 में दुनिया को तबाह होते देखने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रहे ये लोग अब ये दुष्प्रचार कर रहे हैं कि हमारा सूरज अब आकाशगंगा के केंद्र की ओर खिंचा चला जा रहा है और साथ ही ये धरती और दूसरे ग्रहों को भी लेता जा रहा है। इसके नतीजे के तौर पर बताया जा रहा है कि 2012 को धरती के चुंबकीय ध्रुव पलट जाएंगे। 2012 के प्रलय के बारे में जितनी भी बातें कही गई हैं वो सब किसी तिलिस्मी परीकथा से ज्यादा कुछ और नहीं। साइंस पहले भी दुनिया को बेहतर बनाने का काम करती रही है और वैज्ञानिक तथ्यों के नजरिए से देखें तो दुनिया 2012 में और भी ज्यादा सुरक्षित, और भी ज्यादा सुखद और और भी ज्यादा बेहतर होगी। 

डॉ. ई.सी.क्रुप, निदेशक, ग्रिफिथ ऑब्जरवेटरी, लॉस एंजिल्स

4 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छा लगा…ऐसी मूर्खताओं का पर्दाफाश…

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  2. जितनी भी वेब साईटे २०१२ के तथाकथित सर्वनाश की अफवाह को बढ़ावा देती है, वो इस से बचने के उपाय बेच भी रही है!

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  3. MAINE kahi padha tha ki 2012 mai hamara polar star dharti ki axis line ke sabse kareeb hoga uske bad ye (2012 se) axis line se door jane lagega. Polar star badalta rahta hai ye bat to mai janta hoon, lekin 2012 mai ye axis line ke sabse seedh mai hoga ye nahi janta hoon.ye khabar 1993 mai SAHARA news paper mai padhi thi. kya ye 2012 wali bat sahi hai?????? yadi ye sahi hai to kya iska aapke article se bhi koi relation ho sakta hai?

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