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बुधवार, 8 अप्रैल 2009

सितारों का झुरमुट और इटली का भूकंप !


रिक्टर स्केल पर महज 5.8 से 6.2 की तीव्रता वाले भूकंप ने इटली में भारी तबाही मचाई है। 25,000 से ज्यादा लोग बेघर हो गए हैं और हजार से ज्यादा लोग घायल हैं, मरने वालों की सही तादाद पर लंबे वक्त तक विवाद बना रहेगा। हमारे देश के मीडिया के लिए ये कोई खबर नही है, हां अखबारों में खबरें जरूर छप रही हैं, लेकिन नेताओं की परिक्रमा में जुटे टीवी के पास इतना वक्त नहीं कि इटली में आए भूकंप पर ध्यान दे। देश के मीडिया के लिए इटली का बस एक ही मतलब है और वो है सोनिया गांधी।
इटली का भूकंप 2009 की पहली बड़ी आपदा है। 2008 में भी पूरी दुनिया में आतंकवादी हमलों में उतनी जानें नहीं गईं थीं, जितनी कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में आए भूकंप में। इटली में आया भूकंप हमारे लिए चेतावनी की घंटी है, जिससे हम मुंह नहीं मोड़ सकते। बहरहाल इटली के भूकंप की ही बात करें। हमारे देश के एक प्रमुख खगोल वैज्ञानिक कनाड मांडके इटली की बेलाट्रिक्स ऑब्जरवेटरी में डॉ. जियानलुका मासी के साथ काम कर रहे थे। ये ऑब्जरवेटरी सेंट्रल इटली से 90 किलोमीटर दूर है। भारतीय वक्त के मुताबिक सुबह के 7 बज रहे थे वक्त था भूकंप आने से ठीक पहले का। मांडके और डॉ. मासी M13 ग्लोबुलर क्लस्टर का ऑब्जर्वेशन कर रहे थे और उसकी फोटोग्राफ ले रहे थे। ठीक उसी वक्त जमीन थरथरा उठी, तेज भूकंप के कहर से पूरी इटली कांप उठी। जिस वक्त भूकंप आया मांडके और डॉ. मासी ने बेलाट्रिक्स ऑब्जरवेटरी से M13 ग्लोबुलर क्लस्टर की ये तस्वीर खींची। ग्लोबुलर क्लस्टर की ये तस्वीर उस वक्त की गवाह है जब इटली भूकंप से कांप उठी। भूकंप का असर इस तस्वीर में भी हल्के तौर पर देखा जा सकता है। बहरहाल हमारे वैज्ञानिक और ऑब्जर्वेटरी इस भूकंप से सुरक्षित रहने में कामयाब रहे।

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