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रविवार, 20 सितंबर 2009

चंद्रमा पर पानी की मौजूदगी के पहले ठोस संकेत


चंद्रमा पर पहली बार पानी की मौजूदगी के ठोस संकेत सामने आए हैं...चंद्रमा पर हुई ये अब तक की सबसे बड़ी खोज है...और ये खोज की है चंद्रमा पर मौजूद नासा के स्पेसक्राफ्ट लुनर रिकॉनिसेंस ऑरबिटर ने। हमारे लिए ये खबर और भी खास है, क्योंकि नासा के इस स्पेसक्राफ्ट को.. चंद्रमा पर पानी की खोज हमारे चंद्रयान के साथ मिलकर करनी थी। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पानी खोजने के मिशन की शुरुआत नासा के लुनर ऑरबिटर ने चंद्रयान के साथ मिलकर की....लेकिन तभी चंद्रयान से रेडियो संपर्क टूट गया। चंद्रयान के बेकाबू हो जाने पर लुनर रिकॉनिसेंस ऑरबिटर ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव का स्कैनिंग का काम अकेले ही किया...और वहां उम्मीद से कहीं ज्यादा हाइड्रोजन की मौजूदगी खोज निकाली। हाइड्रोजन पानी का मुख्य तत्व है और नासा ने चंद्रमा पर हाइड्रोजन की खोज को चंद्रमा पर पानी की मौजूदगी का पहला ठोस संकेत माना है।
नासा के लुनर रिकॉनिसेंस ऑरबिटर ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ऐसी जगहों की स्कैनिंग की है जो हमेशा अंधेरे में डूबे रहते हैं और जहां तापमान शून्य से 240 डिग्री नीचे रहता है। 1994 में चंद्रमा पर गए नासा के एक दूसरे मिशन क्लीमेंटाइन ने पहली बार ये संभावना जताई थी कि चंद्रमा के इन भीषण ठंड वाले इलाकों के गड्ढ़ों में पानी बर्फ के रूप में मौजूद हो सकता है। तब से चंद्रमा पर पानी की तलाश की जा रही थी, लेकिन वहां पानी की मौजूदगी साबित करने वाले प्रमाण हमें अब तक नहीं मिल सके थे।
चंद्रमा पर पानी के ठोस संकेत पहली बार मिल जाने के बाद अब दुनियाभर के वैज्ञानिकों की निगाहें 9 अक्टूबर को चंद्रमा पर होने वाले एक महत्वपूर्ण प्रयोग पर जा टिकी हैं। इस दिन नासा का स्पेसक्राफ्ट लुनर रिकॉनिसेंस ऑरबिटर साथ गए एक खास इम्पैक्टर की टक्कर चंद्रमा से करवाएगा। चंद्रमा से होने वाली इस टक्कर से उठने वाले धूल के गुबार में पानी के कणों की मौजूदगी तलाशी जाएगी।

1 टिप्पणी:

  1. ये जो नासा कम्पनी ही लोगो को ज्यादा मुर्ख बनाती है.
    सबसे पहेले कहेते है के वहा हवा और पानी नहीं, ओक्सीजन नहीं और आज कह रहे है के पानी है.

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