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गुरुवार, 3 फ़रवरी 2011

एक ‘नई दुनिया’ की खोज !

कैंब्रिज में हॉवर्ड-स्मिथसोनियन सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स के अपने ऑफिस में एस्ट्रोनॉमर दिमित्री सासेलोव कुछ देर बाद होने वाले एक इंटरव्यू के लिए खुद को मानसिक रूप से तैयार कर रहे थे। इस इंटरव्यू के जरिेए वो जो कुछ दुनिया को बताने जा रहे थे, उसे वो बार-बार मन ही मन दोहरा रहे थे और वो इसे जितना दोहराते उतने ही नर्वस होते जा रहे थे। नासा ने स्पेस ऑब्जरवेटरी कैप्लर 2007 में लांच की थी और इसका मकसद था पृथ्वी से मिलते-जुलते ऐसे नए ग्रहों की, जहां जिंदगी मुमकिन हो सकती है। सासेलोव नासा के मिशन कैप्लर के सह-निरीक्षक हैं और अब लांच के करीब तीन साल बाद, नासा मिशन कैप्लर की अब तक की सारी जानकारियां सार्वजनिक करने की प्रक्रिया में थी और शुरुआत होनी थी सासेलोव के बयान से। सासेलोव की दुविधा ये थी कि कैप्लर की नई खोज के बारे में बताने की शुरुआत वो किस तरह करें ? क्योंकि, कैप्लर ने कोई नया ग्रह नहीं, बल्कि हमारे सौरमंडल से मिलता-जुलता 6 ग्रहों के सदस्यों वाला एक भरा-पूरा सौर परिवार ही खोज निकाला था। सासेलोव ने बाद में बताया, “मैं जरूरत से ज्यादा सावधानी बरत रहा था, क्योंकि एक साल पहले एक कांफ्रेंस में जब मैंने कैप्लर के कुछ डाटा सार्वजनिक किए थे, तो दुनियाभर के अखबारों हेडलाइन छा गई थी कि बहुत सी नई धरतियों की खोज। इस बार तो मामला ज्यादा गंभीर था, बात किसी एक ग्रह की खोज के बारे में नहीं थी, इस बार तो मामला एक नए सौरमंडल का था।”
नासा ने मिशन कैप्लर की अब तक की खोज की तमाम जानकारियां सार्वजनिक कर दी हैं। स्पेस ऑब्जरवेटरी कैप्लर ने पहली बार हमारी धरती जैसा एक नया ग्रह और अपने सितारे के हैबिटेट जोन में मौजूद एक ऐसा ग्रह खोज निकाला है, जहां पानी तरल अवस्था में ग्रह की सतह पर मौजूद हो सकता है। मिशन कैप्लर ने अपने सितारे की परिक्रमा करते 6 ग्रहों एक ऐसा नया सौरमंडल खोजा है जिसके 5 ग्रहों का आकार हमारी धरती के जैसा ही है। इस सौरमंडल की सूरज हमारे सूर्य के मुकाबले ठंडा है और सबसे खास बात तो ये कि धरती जैसे आकार वाले इसके सभी पांचों ग्रह अपने सितारे के हैबिटेट जोन में हैं। इस मिशन के सम्मान में नए सौरमंडल के सूरज का नाम कैप्लर-11 रखा गया है। कैप्लर-11 और इसका 6 ग्रहों से भरा-पूरा सौरमंडल हमसे 2000 प्रकाश वर्ष दूर है। हमारे सौरमंडल से बाहर अब तक इतना विशाल और इतना व्यवस्थित सौर-परिवार पहले कभी नहीं खोजा गया था।
इस नई खोज के बारे में बात करते वक्त मिशन कैप्लर से जुड़े सभी वैज्ञानिक अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं। 1,50,000 सितारों से आती रोशनी और उनके सामने से किसी ग्रह के गुजरने से मंद पड़ते प्रकाश को पकड़ने में स्पेस ऑब्जरवेटरी कैप्लर ने असाधारण कुशलता का परिचय दिया है। लेकिन कैप्लर से अभी ऐसे ग्रह की खोज होनी बाकी है जो आकार में हमारी धरती जैसा छोटा हो, भौगोलिक रूप से पथरीला हो और जो अपने सितारे के हैबिटेट जोन के भीतर हो, ताकि पानी वहां की जमीन पर तरल स्वरूप में बह सके और जीवन को पनपने, फलने-फूलने का मौका मिल सके। मिशन कैप्लर ने अभी जो खोजा है उससे हमें केवल नए ग्रह के आकार के बारे में पता चलता है, इससे हमें उस ग्रह के द्रव्यमान के बारे में कुछ पता नहीं चलता। यानि खोजे गए नए ग्रहों के घनत्व और वहां मौजूद तत्वों के बारे में हमें आमतौर पर कुछ भी पता नहीं चल पाता।
नासा के एडमिनिस्ट्रेटर चार्ल्स बोल्डेन बताते हैं कि मिशन कैप्लर ने नए ग्रहों को कल्पना की उड़ान से निकाल कर उन्हें एक हकीकत में बदल दिया है। मंगलवार 1 फरवरी 2011 को जारी किए गए नासा के डेटा के अनुसार अब हमारे सौरमंडल से बाहर खोजे जा चुके नए ग्रहों की तादाद बढ़कर 1,235 हो चुकी है। इनमें से 500 नए ग्रहों की पुष्टि तो ग्राउंड ऑब्जरवेटरीज कर चुकी हैं, बाकी की पुष्टि दुनिया भर में फैली ऑब्जरवेटरीज से की जानी बाकी है। मिशन कैप्लर ने जिन नए ग्रहों को खोजा है उनमें से 68 नए ग्रहों का आकार करीब-करीब पृथ्वी के बराबर है, 288 नए ग्रहों का आकार पृथ्वी से तीन से पांच गुना तक विशाल है, 662 नए ग्रह नेपच्यून जैसे हैं, 165 नए ग्रह हमारे बृहस्पति की तरह हैं और 19 नए ग्रहों का आकार हमारे सौरमंडल के सबसे विशाल ग्रह बृहस्पति से भी कहीं ज्यादा विशाल है।
54 नए ग्रह ऐसे हैं जो अपने-अपने सितारों के हैबिटेट जोन में हैं और इनमें से 5 ग्रह ऐसे हैं जिनका आकार हमारी धरती के बराबर है। हैबिटेट जोन में मौजूद शेष 49 नए ग्रहों में से कुछ सुपर-अर्थ साइज के हैं, तो कुछ हमारी धरती से दोगुने विशाल और कुछ तो बृहस्पति से भी विशाल हैं। मिशन कैप्लर से आई ये ताजा जानकारियां इस स्पेस ऑब्जरवेटरी के उन ऑब्जरवेशंस पर आधारित हैं जो 12 मई से 17 सितंबर 2009 के बीच किए गए थे। इस दौरान कैप्लर ने 1,56,000 सितारों का अध्ययन किया और इस तरह हमने नई पृथ्वी की तलाश में आसमान के सौवें हिस्से को छानने की पहली कोशिश की।
नासा के एम्स रिसर्च सेंटर, कैलीफोर्निया में काम कर रहे मिशन कैप्लर के मुख्य वैज्ञानिक निरीक्षक विलियम बोरुकी कहते हैं, “ हमने अपनी पहली कोशिश में ही आकाश के एक छोटे से हिस्से में इतने नए ग्रह ढूंढ़ निकाले, इससे पता चलता है कि हमारी आकाशगंगा में अनगिनत ग्रह अपने-अपने सितारों की परिक्रमा कर रहे हैं। हमने शून्य से शुरुआत करके पृथ्वी जैसे आकार वाले 68 नए ग्रह ढूंढ़ निकाले और शून्य से ही शुरुआत करके 54 ऐसे नए ग्रह खोज डाले हैं, जिनमें से कुछ की धरती पर शायद पानी अपने तरल स्वरूप में बहता हो। ”
नए सौरमंडल कैप्लर-11 के सभी 6 ग्रहों की पुष्टि दूसरी ऑब्जरवेटरीज से भी हो चुकी है और इन सबका परिक्रमा-पथ हमारे शुक्र के भी छोटा है। इस नए सौर-परिवार के पांच ग्रहों का परिक्रमा-मार्ग तो बुध से भी छोटा है। इसके अलावा एक दूसरा सितारा जिसके सामने से इसके ग्रह को गुजरता हुआ देखा गया है, वो है कैप्लर-9। सितारे कैप्लर-9 के भी तीन ऐसे ग्रहों का पता चला है जो इसकी परिक्रमा कर रहे हैं।
नासा की एम्स लैब में काम कर रही मिशन कैप्लर की साइंस टीम के सदस्य और प्लेनेटेरी साइंटिस्ट जैक लिसौर कहते हैं, “ कैप्लर-9 सौरमंडल की बनावट और इसका व्यवस्थित क्रम अदभुत है। इससे हमें ये पता चल सकेगा कि इसकी रचना कैसे हुई। सूरज कैप्लर-11 की परिक्रमा कर रहे सभी 6 ग्रह पथरीले भी हैं और गैसीय भी। शायद इनमें से कुछ पर पानी भी मौजूद हो। ये सभी नए ग्रह हमारे सौरमंडल से बाहर खोजे गए सबसे हल्के ग्रहों में से हैं।”

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