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गुरुवार, 24 फ़रवरी 2011

"हमारे सूरज के जुड़वां का वजूद मुमकिन"


साइंस जर्नल इकरस के नवंबर 2010 के अंक में एक ऐसा पेपर पब्लिश हुआ जिसने स्पेस साइंस में एक नई हलचल मचा दी। ये रिसर्च पेपर था एस्ट्रोफिजिसिस्ट जॉन मैटसे और डैनियल व्हिटमायर का और अपने इस पेपर में इन दोनों वैज्ञानिकों ने संभावना जताई थी कि हमारे सौरमंडल के बाहरी आवरण ओर्ट्स क्लाउड रीजन में हमारे सूरज का जुड़वां मौजूद हो सकता है। यानि सूरज से छिटका वो पदार्थ जो सितारा नहीं बन सका और सौरमंडल की रचना की प्रक्रिया के दौरान एक विशाल गैस जाइंट की शक्ल में इस ओर्ट्स क्लाउड रीजन में छिटक गया। इन वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि सूरज का जुड़वा ये गैस जाइंस हमारे बृहस्पति से भी चार गुना ज्यादा विशाल हो सकता है। इन शोधकर्ताओं ने इस संभावित गृह का नाम टाईकी रखा और अपने इस पेपर में सिफारिश की कि उनके आंकलन की जांच वाइड-फील्ड इंफ्रारेड सर्वे एक्सप्लोरर यानि वाइस मिशन से कराई जाए। वाइस नासा का मिशन है, जो ऐसी स्पेस ऑब्जरवेटरी है जो इंफ्रारेड आंखों की मदद से अंतरिक्ष की छानबीन में जुटी है। चार अलग-अलग इंफ्रारेड वेवलेंथ से डेढ़ बार अंतरिक्ष को छान चुकी स्पेस ऑब्जरवेटरी वाइस ने दूर-दराज की आकाशगंगा से लेकर धरती से करीब मंडराती छोटी उल्काओं तक की ढाई करोड़ से ज्यादा तस्वीरें लेकर नासा को भेजी हैं। ये तस्वीरें ही वाइस का वो डेटा हैं जिनकी गहन जांच की जा रही है और जिनके शुरुआती डेटा इस साल अप्रैल में सार्वजनिक किए जाएंगे। स्काई स्कैनिंग के दौरान वाइस ने अल्ट्रा कोल्ड स्टार यानि ब्राउन ड्वार्फ से लेकर 20 नए धूमकेतुओं, 134 नियर अर्थ ऑब्जेक्ट्स और मंगल और बृहस्पति के बीच मौजूद उल्काओं की बेल्ट में 33,000 नई उल्काओं की खोज की है। इस महत्वपूर्ण खोज के बाद वाइस अब फरवरी 2011 से हाइबरनेशन यानि शीतनिद्रा में चली जाएगी, यानि वैज्ञानिक इस स्पेस ऑब्जरवेटरी के कंप्यूटर्स को शट डाउन कर देंगे, ताकि ये ऑब्जरवेटरी अगले एसाइनमेंट के लिए तैयार हो सके। इस दौरान वाइस के डेटा के विश्लेषण का काम चलता रहेगा और वाइस के फाइनल डेटा मार्च 2012 में रिलीज किए जाएंगे। यानि इस सवाल, कि क्या हमारे सौरमंडल के नौंवे ग्रह का अस्तित्व है, का जवाब पूरी तरह से मार्च 2012 में ही मिल सकेगा जब वाइस के फाइनल डेटा जारी किए जाएंगे। इस दौरान हमें इस सवाल से संबधित कुछ प्रमुख सवालो पर नासा की जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी के वैज्ञानिक और प्रमुख ग्रह खोजी व्हिटने क्लेविन के जवाब प्राप्त हुए हैं। पेश हैं ये सवाल-जवाब -
 सवाल - वाइस के डेटा से इस बात की पुष्टि या खंडन कब तक हो सकेगा कि टाइकी नाम का कोई ग्रह है या नहीं?
क्लेविन - अभी ये कहना बहुत जल्दबाजी होगा कि हमें ये सच्चाई कब तक मालूम हो सकेगी कि ओर्ट्स क्लाउड में टाईकी नाम का कोई विशाल ग्रह वजूद में है या नहीं। इसके लिए अभी हमें ऑब्जरवेशन में कुछ और साल लगाने होंगे तभी हम जान सकेंगे कि वाइस ने वाकई कोई ऐसी चीज देखी है या नहीं। स्पेस ऑब्जरवेटरी वाइस के कामकाज शुरू करने के बाद के पहले 14 हफ्तों के डेटा इस साल अप्रैल में जारी किए जा रहे हैं, लेकिन इस सवाल का जवाब देने के लिए ये नाकाफी हैं। वाइस का फुल सर्वे डेटा मार्च 2012 में जारी किया जाएगा, तभी हमें इसमें जवाब की कोई झलक दिख सकेगी। वाइस के डेटा के वैज्ञानिक विश्वेषण का काम पूरा हो जाने के बाद ही पता चलेगा कि मैटसे और व्हिटमायर के आंकलन सही है या नहीं।
सवाल - अगर ओर्ट्स क्लाउड रीजन में टाइकी जैसा कोई ग्रह हुआ तो क्या ये तय है कि वाइस ने उसे जरूर देखा होगा?
क्लेविन - हां इसकी पूरी संभावना है, लेकिन फिरभी टाइकी का वजूद है या नहीं, केवल वाइस के डेटा से इसकी पुष्टि नहीं हो सकती। देखिए पहले वाइस ने पूरे स्काई का सर्वे किया, इसके छह महीने बाद अपनी दो इंफ्रारेड बैंड्स की मदद से उसने फिर उन सभी इलाकों पर दोबारा नजर डाली। अगर टाइकी जैसी कोई बॉडी वहां मौजूद है तो छह महीने के दौरान उसकी पोजीशन में फर्क जरूर आया होगा। ये जो दो खास इंफ्रारेड बैंड्स हैं, इनके इस्तेमाल से दूसरे स्काई सर्वे के दौरान छोटे पिंड, अल्ट्रा कोल्ड स्टार्स या ब्राउन ड्वार्फ की पहचान की गई है, जो कि बृहस्पति से भी विशाल गैसीय ग्रह जैसे भी हो सकते हैं, टाइकी के बारे में भी ऐसा ही बताया गया है। लेकिन इसकी पुष्टि के लिए ग्राउंड ऑब्जरवेशन भी जरूरी है।
सवाल - अगर टाइकी का वजूद वाकई में है, तो अपने ही सौरमंडल में एक और ग्रह की खोज करने में इतना वक्त क्यों लग गया?
क्लेविन - देखिए टाइकी एक अल्ट्रा कोल्ड बॉडी होगी, जो किसी भी दृश्य रोशनी के टेलिस्कोप के लिए अदृश्य होगी। क्योंकि ऐसी अल्ट्रा कोल्ड बॉडीज से ऐसे इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडियन नहीं निकलते जिन्हें हम देख सकते हैं। हमारे देखने की एक सीमा है, जो बहुत थोड़ी है। ऐसी अल्ट्राकोल्ड चीजों से फूटने वाली ग्लो यानि रोशनी को किसी संवेदनशील इंफ्रारेड टेलिस्कोप की मदद से ही पकड़ा जा सकता है, बशर्ते वो सही दिशा में देख रही हों। स्पेस ऑब्जरवेटरी वाइस एक संवेदनशील इंफ्रारेड ऑब्जरवेटरी है, जो सभी दिशाओं में देख सकती है।
सवाल - इस संभावित ग्रह का नाम टाइकी क्यों रखा गया? आखिर एक यूनानी नाम का चुनाव क्यों किया गया, जबकि बाकी सभी दूसरे ग्रहों के नाम रोमन माइथोलॉजी से लिए गए हैं?
क्लेविन - 1980 में ये संभावना जताई गई कि शायद सूरज का भी कोई साथी है, शायद हमारी दुनिया दो सूरज वाली है, लेकिन ये दूसरा सूरज कहीं छिपा है। यूनानी देवी के नाम पर इस दूसरे सूरज का नाम रखा गया- नेमेसिस। संभावना ये भी जताई गई कि एक निश्चित अंतराल पर पृथ्वी पर हुए सामूहिक विनाश की घटनाओं के रहस्य को नेमेसिस से जोड़कर समझा जा सकता है। गणना की गई कि नेमेसिस का परिक्रमा-पथ बहुत ज्यादा इलिप्टिकल होगा, जिससे शायद हर ढाई करोड़ साल में एक बार ओर्ट्स क्लाउड रीजन में मौजूद धूमकेतुओं को भारी उथल-पुथल को जन्म देता होगा, ये घटना इतनी बड़ी होती होगी कि यहां से आंतरिक सौरमंडल के लिए धूमकेतुओं की एक बौछार सी फूट पड़ती होगी। इनमें से कुछ धूमकेतु पृथ्वी से जा टकराते होंगे, जिससे वहां मौजूद जीवन का बिल्कुल सफाया सा हो जाता होगा।
लेकिन हाल के वैज्ञानिक अध्ययनों से नेमेसिस परिकल्पना की पुष्टि नहीं हुई और नियमित अंतराल से पृथ्वी पर होने वाले जीवन के सफाये की घटनाओं से इसका कोई संबंध नहीं निकला। इसका मतलब ये कि नेमेसिस की परिकल्पना में कोई दम नहीं निकला और ये महज कल्पना की उड़ान से ज्यादा कुछ और साबित नहीं हुई। फिरभी, ये पूरी तरह मुमकिन है कि हमारे सूरज से बहुत दूर इसके एक ऐसे जुड़वां साथी का वजूद हो, जिसे अब तक देखा नहीं गया है और जो एक वृत्ताकार कक्षा में कुछ लाख साल में सूरज की परिक्रमा कर रहा हो। अगर ऐसा है भी तो हमारे सौरमंडल के जीवन पर इसका कोई असर नहीं है। वैज्ञानिकों ने इस जुड़वां सूरज नेमेसिस का संबंध नौंवें संभावित ग्रह से जोड़ने के लिए ही उसका नाम टाइकी रखा, जो यूनानी माइथोलॉजी के मुताबिक देवी नेमेसिस की बहन है।

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