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सोमवार, 5 अक्तूबर 2009

धार्मिक वैज्ञानिक !

भारतीय वैज्ञानिक उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं। लेकिन जब भगवान की बात आती है तो प्रत्येक 4 में से एक वैज्ञानिक 'सवोर्च्च सत्ता' के अस्तित्व को अधिक विश्वास के साथ स्वीकार करते हैं। देश की 130 यूनिवर्सिटी और रिसर्च संस्थानों के 1100 वैज्ञानिकों पर किए गए सवेर्क्षण में यह बात सामने आई है। सर्वे के मुताबिक, इनमें से 29 फीसदी 'कर्म' के दर्शन में विश्वास रखते हैं तो 26 फीसदी मृत्यु के बाद जीवन के सिद्धांत में भरोसा जताते हैं। वहीं दूसरी ओर 7 फीसदी रिसर्चर भूतों के अस्तित्व को स्वीकार करते हैं। इंस्टिट्यूट फॉर द स्टडी आफ सेक्युलरिज्मम इन सोसायटी एंड कल्चर औऱ हैदराबाद स्थित सेंटर फॉर इन्क्वायरी द्वारा किए गए सर्वे में 64 फीसदी वैज्ञानिकों ने कहा कि वे अपने नैतिक तथा धामिर्क मूल्यों के चलते जैविक हथियारों का डिजाइन तैयार नहीं करेंगे। जबकि 54 फीसदी का कहना था कि वे इन्हीं कारणों के चलते परमाणु हथियारों पर काम नहीं करेंगे। 41 फीसदी अंतरिक्ष वैज्ञानिक अंतरिक्ष परियोजनाओं के सफल संचालन के लिए भगवान का आर्शीवाद जरूरी मानते हैं। 2005 में अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने रॉकेट तथा उपग्रह के प्रक्षेपण से पूर्व भगवान वेंकटेश्वर का आर्शीवाद हासिल करने के लिए तिरूपति की यात्रा की थी। सर्वेक्षण के दायरे में शामिल कुल वैज्ञानिकों में से एक चौथाई भगवान में पक्की आस्था रखने वाले थे। जबकि अन्य एक चौथाई भगवान के अस्तित्व के बारे में संशयवादी विचार रखते थे।

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