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मंगलवार, 6 जुलाई 2010

एलियन्स को लेकर बेकार ही परेशान हैं हॉकिंग


स्टीफन हॉकिंग एलियन्स को लेकर काफी परेशान हैं। इस मशहूर भौतिकशास्त्री ने हाल ही में सुझाव दिया था कि हमें एलियन्स से संपर्क की कोई कोशिश नहीं करनी चाहिए। मिसाल के तौर पर हॉकिंग ने याद दिलाया था कि जब अमेरिका पर यूरोपियन्स के कदम पड़े तो उस जमीन के असली मालिक रेड इंडियन्स का क्या हाल हुआ था। हॉकिंग ये मानकर चल रहे हैं कि धरती पर आने वाले परग्रहीय सभ्यता के प्राणी टेक्नोलॉजी में हमसे बहुत आगे होंगे और उनसे हमारी पहली मुलाकात संपूर्ण मानव सभ्यता के लिए एक बुरी खबर साबित होगी।
हॉकिंग इसके जरिए मेरे रोजमर्रा के काम के एक संभावित नतीजे का अनुमान लगाने की कोशिश कर रहे हैं। मैं दुनियाभर में फैले तमाम सहयोगियों के साथ एक छोटे से मिशन में जुटा हूं, जिसे दुनिया- सर्च फॉर एक्स्ट्रा टेरेस्टि्रियल इंटेलिजेंस यानि 'सेटी' के नाम से जानती है।
अगर किसी दिन हमें अपने मिशन में कामयाबी मिल गई, यानि हमें एलियन्स के सिगनल्स मिल गए, तो जरा सोचिए, क्या होगा? क्या ऐसे में हमें एलियन्स के सिगनल्स का जवाब देना चाहिए? क्योंकि हमारा ब्रॉडकास्ट दूर सितारों पर रहने वाले उन एलियन्स के सामने धरती का पूरा पता जाहिर कर देगा। हॉकिंग के शब्दों में ऐसे में हमारे सिगनल्स पकड़ते ही एलियन्स की हमलावर सेना धरती की ओर कूच कर देगी।
एलियन सभ्यता से कोई रेडियो सिगनल या मैसेज मिलने पर हमें क्या करना चाहिए? सेटी प्रोजेक्ट में काम करने वाले वैज्ञानिकों की एक टीम, इंटरनेशनल एकेडमी आफ एस्ट्रोनॉटिक्स में तीन साल से इस सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश कर रही है।
सच्चाई तो ये है कि अनजान सभ्यताओं की तलाश में अपनी ओर से रेडियो सिगनल्स को भेजना बंद कर देना कोई समझदारी नहीं होगी। बल्कि मैं तो ये कहूंगा कि अपने सिगनल्स को रोक देने के लिए अब बहुत देर हो चुकी है। पिछले 60 साल से हम अपने टीवी, रेडियो और राडार सिगनल्स के जरिए, सितारों भरे आसमान में अपनी मौजूदगी का खुल्लम-खुल्ला प्रचार कर रहे हैं। अक्टूबर 1951 में पहली बार ब्राडकास्ट हुआ मशहूर टेलीविजन कार्यक्रम 'आई लव लूसी' भी अब तक 6000 से ज्यादा स्टार सिस्टम्स को पार कर चुका होगा और हर दिन एक नए सौरमंडल को पार करता चला जा रहा है। हमारे टीवी प्रेग्राम के रेडियो सिगनल के रेडिएशन को पकड़ना कोई मुश्किल काम नहीं है। हालांकि दूरी के साथ ये सिगनल कमजोर पड़ते जाएंगे, लेकिन सबसे नजदीक की एलियन सभ्यता भी अगर 1000 प्रकाश वर्ष के दायरे में है तो वो इस सिगनल को पकड़ लेगें, बशर्ते उनकी एंटीना टेक्नोलॉजी हमसे एक या दो सदी आगे की हो।
अगर एलियन सभ्यताएं हमारे स्तर तक भी विकसित हुईं तो वो भले ही हमारे टेलीविजन और राडार सिगन्स को न पकड़ पाएं, लेकिन सेटी प्रोजेक्ट के तहत हम जो रेडियो सिगनल जानबूझकर भेजते हैं, इन्हें वो आसानी से पकड़ सकती हैं। ऐसे में अपने जैसी सभ्यताओं से भला क्या डरना?
असली बात ये कि अगर कोई एलियन सभ्यता वाकई खतरनाक है, तो हम उन्हें सिगनल भेजें या न भेजें, इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। ऐसी सभ्यता अपने सूरज का इस्तेमाल एक ग्रेविटेशनल लेंस की तरह करके हमारे शहरों की सड़कों पर जलने वाले नाइट स्ट्रीट लैम्प्स तक की रोशनी भी आसानी से देख सकती हैं। ऐसे में हॉकिंग की चेतावनी का क्या मतलब है?
- सेथ शॉस्टैक
(लेखक सेटी इस्टीट्यूट के वरिष्ठ वैज्ञानिक और इंटरनेशनल एकेडमी आफ एस्ट्रोनॉटिक्स के चेयरमैन हैं)

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