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शनिवार, 31 जुलाई 2010

'उनको' मनाइए चंद्रमा के फूल से!

जानते हैं, दुनिया का सबसे मुश्किल काम क्या है? अगर शादीशुदा हैं तो रूठी हुई पत्नी, और अगर अभी शादी का इंतजार कर रहे हैं तो नाराज प्रेमिका को मनाना। खैर आने वाले वक्त में ये मुश्किल आसान होने वाली है। नहीं, चांद-तारे तो तोड़कर तब भी नहीं ला पाएंगे, लेकिन हां, रूठी हुई 'उनको' मनाने के लिए आप चंद्रमा के फूल जरूर उन्हें दे पाएंगे। चंद्रमा के फूल की भेंट के बाद आप उन्हें खास मून रेस्टोरेंट में ले जाएंगे जहां चंद्रमा पर उगी सब्जियों और फलों के रोमांटिक 'मून-लाइट डिनर' के साथ यादगार वक्त गुजारेंगे।
आने वाले कल में आप ये सब वाकई कर पाएंगे, क्योंकि चंद्रमा के अध्ययन में जुटे विशेषज्ञों ने सिफारिश की है कि भविष्य में चंद्रमा पर जाने वाले अभियानों का मुख्य मकसद 'चंद्रमा पर खेती' की शुरुआत करना होना चाहिए। इन चंद्र-वैज्ञानिकों का मानना है कि चंद्रमा की धूल से बेशकीमती तत्व हासिल करने में पेड़-पौधे हमारी सबसे ज्यादा मदद कर सकते हैं।
नासा के अपोलो कार्यक्रम के दौरान चंद्रमा से लाए गए धूल और मिट्टी के नमूनों के परीक्षण से साबित हो चुका है कि चंद्रमा की धूल में कोई भी ऐसा जहरीला तत्व मौजूद नहीं है, जो मानवों, जानवरों या फिर पेड़-पौधों के लिए किसी भी तरह से नुकसानदेह हो। अपोलो कार्यक्रम के दौरान एक खास मिशन शुरू किया गया था, जिसका मकसद ये जानना था कि चंद्रमा की मिट्टी पाकर पेड़-पौधे किस तरह की प्रतिक्रिया करते हैं? लेकिन अपोलो मिशन के साथ ही ये कार्यक्रम भी बीच में ही बंद कर दिया गया। अब यूनिवर्सिटी आफ फ्लोरिडा फिर से इस कार्यक्रम की शुरुआत कर रही है। वैज्ञानिकों की दिलचस्पी ये जानने में है कि पौधे चंद्रमा की मिट्टी से पोषक तत्व किस तरह से लेते हैं?

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