समर्थक

गुरुवार, 15 जुलाई 2010

कहानी स्टुडसैट की

तीन साल पहले इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. डी.वी.ए. राघवमूर्ति कॉलेज के कुछ स्टूडेंट्स को बता रहे थे कि अंतरिक्ष की खोज कितनी रोमांचक है और हमें साइंस क्यों पढ़नी चाहिए। स्मॉल सेटेलाइट्स प्रोजेक्ट के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. राघवमूर्ति का ये व्याख्यान छात्रों को इतना प्रेरक लगा कि सत्र से खत्म होने पर छात्रों की एक टीम ने उनसे मुलाकात की और पूछा कि हम एक छोटा सेटेलाइट बनाना चाहते हैं, इस काम में हम इसरो की मदद कैसे ले सकते हैं? स्टुडसैट की कहानी बस यहीं से शुरू होती है। हाल ही में देश के बेहद महत्वपूर्ण सेटेलाइट कार्टोसेट-2 बी के साथ भेजे गए चार सेटेलाइट्स में बैंगलोर और हैदराबाद के छात्रों का बनाया ये नन्हा सेटेलाइट 'स्टुडसैट' भी शामिल था। स्टुडसैट के बारे में ताजा अपडेट ये है कि बैंगलोर के सेटेलाइट सेंटर के निदेशक टी.के. एलेक्स ने खबर दी है कि ग्राउंड स्टेशन को स्टुडसैट के सिगनल्स रिसीव होने लगे हैं।

इस छोटे से सेटेलाइट्स को बैंगलोर के चार और हैदराबाद के तीन इंजीनियरिंग कॉलेजेज के 35 स्टूडेंट्स ने मिलकर बनाया है। स्टुडेंट्स ने नासा के साथ मिलकर स्टुडसैट में एक इमैजिंग कैमरा और कई आधुनिक उपकरण लगाए हैं। स्टूडेंट साइंटिस्ट्स की टीम से जुड़ी बैंगलोर इंजीनियरिंग कालेज की एक छात्रा श्वेता प्रसाद को स्टुडसैट प्रोजेक्ट से इस कदर लगाव हो गया कि इस टीम के साथ काम करने के लिए उन्होंने एक बढ़िया सैलरी वाले एक शानदार जॉब का ऑफर ही ठुकरा दिया।

स्टुडसैट की कामयाबी ने देश में साइंस स्टूडेंट्स के बीच एक्सपेरीमेंट और इनोवेशन का एक नया दौर शुरू कर दिया है। आईआईटी कानपुर के स्टूडेंट्स अपने तीन किलो के सेटेलाइट 'जुगनू' के बाद अब दूसरे सेटेलाइट की डिजाइन पर काम कर रहे हैं। आईआईटी मुंबई के स्टूडेंट्स 'प्रधान' नाम के अपने सेटेलाइट को बनाने में जुटे हैं। अन्ना यूनिवर्सिटी के 40 किलो के सेटेलाइट 'अनुसैट' की कामयाबी के बाद चेन्नई की एसआरएम यूनिवर्सिटी और सत्यभामा यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स भी 10 किलो से कम दो सेटेलाइट्स को विकसित करने में जुटे हैं।

स्टुडसैट काम कैसे करेगा

सेटेलाइट स्टुडसैट के साथ एक कैमरा लगा हुआ है जो 637 किलोमीटर की ऊंचाई से 90 मीटर के रेजोल्यूशन की तस्वीरें हैम कोड में ले सकता है। इस कैमरे से पृथ्वी की तस्वीरें ली जा सकती हैं, जिससे स्टूडेंट्स खुद ही मौसम का आंकलन कर सकते हैं। अपने स्टुडसैट से डेटा रिसीव करने के लिए स्टूडेंट्स ने बैंगलोर में एक ग्राउंड कंट्रोल भी बनाया है। ये अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें