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गुरुवार, 15 जुलाई 2010

सितारों के जन्म का राज खुला

उगते सूरज को देखिए, ये अधेड़ उम्र का एक सितारा है। कभी सोंचा है कि सूरज जैसे आसमान के इन लाखों-करोड़ों सितारों का जन्म कैसे होता है? जानते हैं, ये ऐसा सवाल है जो सदियों तक वैज्ञानिकों को परेशान करता रहा है। तमाम सिद्धांतों के बावजूद हम अब तक सही-सही ये नहीं जानते थे कि आाखिर सितारे जन्म कैसे लेते हैं। लेकिन एक ताजा खोज ने इस सवाल का जवाब दे दिया है।

मिशगन यूनिवर्सिटी के एस्ट्रोनॉमर और नासा सगान एक्सोप्लेनेट के फेलो डॉ. स्टीफन क्राउस बताते हैं कि लंबे वक्त से दुनियाभर के वैज्ञानिक ये जानने की कोशिश कर रहे हैं कि बड़े, विशाल सितारे जन्म कैसे लेते हैं? क्योंकि चारों ओर गर्म गैसों और धूल से घिरे ऐसे सितारे बढ़ने और फैलने के लिए बहुत ज्यादा जगह लेते हैं। इन बादलों से उन्हें अलग करके देखना बहुत मुश्किल है। चारों ओर दहकती गैसों और धूल के बादलों से घिरी विशाल सितारों की नर्सरी में झांकने के लिए डॉ. क्राउस की टीम ने चिली में मौजूद यूरोपियन साउदर्न ऑब्जरवेटरी के वेरी लॉर्ज टेलिस्कोप इंटरफेरोमीटर का इस्तेमाल किया। वैज्ञानिकों की टीम ने इसे धनु राशि के तारामंडलों में हमसे करीब 10,000 प्रकाश वर्ष दूर मौजूद सितारे IRAS 13481-6124 की ओर फोकस किया। हमारे सूरज के मुकाबले सितारा IRAS 13481-6124 करीब 20 गुना ज्यादा विशाल है। डॉ. क्राउस बताते हैं कि ये एक अनोखा एक्सपेरीमेंट था और इससे हमें इस विशाल सितारे की नर्सरी के अंदरूनी हिस्से की बहुत साफ तस्वीरें मिली हैं। इस एक्सपेरीमेंट से वैज्ञानिकों की इस टीम के हाथ एक जैकपॉट नतीजा लगा है। दहकती हुई गैसों और तपते हुए गैस के विशाल बाहल एक विशाल शिशु सितारे को चारों ओर से घेरे हुए थे। विशाल सितारे की नर्सरी के भीतर का ये अदभुत नजारा पहली बार देखा गया। डॉ. क्राउस ने बताया कि गर्म गैसों और धूल की ये डिस्क बिल्कुल वैसी ही थी, जैसी की आमतौर पर छोटे और सामान्य सितारों की नर्सरी को घेरे हुए नजर आती है। यानि विशाल सितारों के जन्म की प्रक्रिया और छोटे-सामान्य सितारों के जन्म लेने की प्रक्रिया बिल्कुल एक है। ये बेहद अनोखी खोज है, हम सभी वैज्ञानिक तो खुशी में भरकर चीख उठे थे। डॉ. क्राउस की टीम की इस खोज ने साबित कर दिया है कि विशाल सितारों का जन्म दो या दो से ज्यादा सितारों के एक-दूसरे में समा जाने से नहीं होता, बल्कि विशाल सितारे में तपती हुई गैसों और दहकते धूल के बादलों के गर्भ से उसी तरह जन्म लेते हैं जैसे कि छोटे और सामान्य सितारों का जन्म होता है। इस खोज का महत्व इससे भी बड़ा है, डॉ. क्राउस की टीम की इस खोज से पता चलता है कि सूरज जैसे सामान्य सितारे के परिवार में मौजूद हमारी धरती की तरह विशाल सितारों के परिवार में भी पृथ्वी जैसे जीवित ग्रहों की मौजूदगी मुमकिन हो सकती है।

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