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गुरुवार, 5 अगस्त 2010

नासा के मंगल मिशन की जिम्मेदारी भारतीय वैज्ञानिक को


हम भारतीयों के लिए नासा से एक खुशखबरी आई है। मंगल ग्रह की कक्षा में मौजूद नासा के सबसे आधुनिक ऑरबिटर मिशन 'मार्स रिकॉनिसां ऑरबिटर' यानि एमआरओ की जिम्मेदारी भारतीय मूल के वैज्ञानिक डॉ. फिल वर्गीज को सौंप दी गई है। मूल रूप से केरल के रहने वाले डॉ. फिल वर्गीज को नासा ने मिशन एमआरओ का प्रोजेक्ट मैनेजर बना दिया है। डॉ. वर्गीज अमेरिका के लॉस एंजिल्स में रहते हैं। नासा वैज्ञानिक डॉ. वर्गीज के लिए मंगल की निगरानी कोई नई बात नहीं, क्योंकि इससे पहले 2004 से वो नासा के एक पुराने ऑरबिटर मिशन द मार्स ओडिसी का कामकाज देख रहे थे। डॉ. वर्गीज अमेरिका के कैलिफ में मौजूद नासा की जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी में 1989 से बतौर वैज्ञानिक काम कर रहे हैं। डॉ. वर्गीज फुलब्राइट स्कालरशिप पर फिजिक्स की पढ़ाई करे के लिए 1971 में केरल से अमेरिका आए थे। यूनिवर्सिटी आफ ओरेगॉन से उन्होंने फिजिक्स में पीएचडी पूरी की और इसके बाद करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने कंप्यूटर और एयरोस्पेस कंपनियों में काम किया।
नासा ने जब मंगल ग्रह पर ऑरबिटर मिशन भेजे तो उन्हें जेट प्रोपल्शन लैबोरेट्री के मार्स ऑरबिटर प्रोजेक्ट में बतौर इंजीनियर काम करने का मौका मिला। जेपीएल के जिम एरिक्सन ने दिसंबर 2006 से लेकर फरवरी 2010 तक मंगल ग्रह पर मौजूद नासा के सबसे महत्वपूर्ण ऑरबिटर मिशन एमआरओ के प्रोजेक्ट मैनेजर की जिम्मेदारी संभाली। अब नासा ने ये जिम्मेदारी भारतीय मूल के वैज्ञानिक डॉ. फिल वर्गीज को सौंप दी है।
मिशन एमआरओ

मार्स रिकॉनिसां ऑरबिटर मंगल ग्रह की कक्षा में मौजूद नासा के मंगल अभियान का अब तक का सबसे सफल और बहुउद्देश्यीय मिशन है। नवंबर 2006 में मंगल ग्रह की कक्षा में स्थापित हो जाने के बाद से अब तक मिशन एमआरओ ने मंगल ग्रह की हाई रेजोल्यूशन इतनी तस्वीरें भेजीं हैं, जितनी कि नासा को अपने पूरे चंद्रमा अभियान यानि अपोलो मिशन से भी नहीं मिली थीं। करीब 720 मिलियन अमेरिकी डॉलर की लागत वाला मिशन एमआरओ खास कैसरों, स्पेक्ट्रोमीटर्स और राडार जैसे उपकरणों से लैस है और मंगल ग्रह की भौगोलिक संरचना, वहां की मिट्टी में मौजूद खनिजों की पहचान और मंगल ग्रह पर पानी की खोज करना(जो कि ये कर चुका है) इस मिशन का मुख्य मकसद है। साथ ही मिशन एमआरओ को उन जगहों की पहचान भी करनी है, जहां मंगल ग्रह जाने वाला पहला मानव मिशन लैंड करेगा और जहां पहली मानव बस्तियां बसाई जा सकती हैं।

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