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रविवार, 8 अगस्त 2010

सावन की शाम और ग्रहों का त्रिकोण


सावन का मौसम यूं तो घटाओं और रिमझिम फुहारों के लिए मशहूर है...लेकिन इस बार का सावन कुछ अलग है। आसमान में उड़ते बादल और धरती पर धूप-छांप के खेल के बीच, क्षितिज अकसर बादलों से ढ़ंका नजर आता है। लेकिन अगर सूरज के डूबने की दिशा किसी रोज बादलों से खाली हो, तो आप पश्चिमी आसमान में क्षितिज से थोड़ा ऊपर कुदरत का अनोखा नजारा देख सकते हैं। यहां आपको बेहद चमकदार सितारे के रूप में शुक्र ग्रह और उससे ठीक ऊपर शनि और शनि के बिल्कुल सामने मंगल ग्रह एक त्रिकोण की शक्ल में नजर आएंगे। ग्रहों का ये त्रिकोण हर साल नहीं बनाता और बिना किसी टेलिस्कोप की मदद से अपने सौरमंडल के चार ग्रहों को एकसाथ देखने का ये सबसे शानदार मौका है। चार ग्रह से आप कहीं चक्कर में तो नहीं पड़ गए? कि भई ग्रहों के त्रिकोण के तीन ग्रह तो शुक्र, शनि और मंगल हैं, फिर चौथा ग्रह कौन सा है? भई, चौथा ग्रह हमारी पृथ्वी है, जहां से आप आसमान में ग्रहों की इस तिकड़ी को देखेंगे। आसमान के कैनवस पर सजा ये खूबसूरत नजारा 11 अगस्त से बेहद रोमांचक हो उठेगा, जब 'परसीड मेट्योर शॉवर' अपने पीक पर होगा। यानि 11 अगस्त से आपको ग्रहों के इस त्रिकोण से उल्काओं की बारिश का नजारा भी दिखने लगेगा। 12 अगस्त को सीन फिर से बदलेगा और ग्रहों का ये त्रिकोण तब और भी आकर्षक हो उठेगा जब पतला सा अर्धचंद्र चमकदार शुक्र के ठीक नीचे नजर आने लगेगा। पतला सा चंद्रमा और इसके ऊपर ग्रहों का त्रिकोण और उससे होती उल्काओं की बारिश का ये शानदार नजारा आपको 13 अगस्त तक नजर आएगा। इसके बाद आसमान के शो के सारे कलाकार अपनी-अपनी राह पर निकल जाएंगे। यहां खास ध्यान रखने की बात ये, कि आसमान के इस शानदार शो को देखने के लिए पश्चिमी क्षितिज पर बादल नहीं होने चाहिए। इसके अलावा मुमकिन है कि परसीड मेट्योर शॉवर आपको शहरों से नजर न आए। इसकी वजह शहरों की चमकदार रोशनी है, जो मेट्योर शॉवर की चमक को ढंक लेती है। अगर बादल नहीं हैं तो शहरी इलाकों से दूर ग्रामीण या कस्बाई इलाकों से मेट्योर शॉवर यानि टूटते तारों का नजारा बिल्कुल साफ नजर आएगा। 'ग्रहों का त्रिकोण' तो आपको पश्चिमी आसमान पर सूरज डूबने के फौरन बाद से नजर आने लगेगा और साफ आसमान पर ये त्रिकोण रात करीब 9 बजे तक नजर आ सकता है। तो फिर तैयार हो जाइए, सावन की शाम, आसमान में चल रहे इस अनोखे शो के लिए।

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