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शनिवार, 21 अगस्त 2010

सितारों भरे मेले में, मां पृथ्वी की उंगली थामे नन्हा चंद्रमा

अपनी मां की उंगली थामकर सितारों के मेले का मजा लेता एक छोटा सा बच्चा। इस तस्वीर में बाईं ओर नीचे की ओर देखिए, एक बड़ा चमकदार सितारा और उसके बिल्कुल करीब मौजूद एक दूसरा नन्हा चमकीला तारा। जुड़वां सितारों के जैसे नजर आ रहे ये दोनों हमारी पृथ्वी और चंद्रमा हैं। पृथ्वी की ये अनोखी तस्वीर ली है हमारे सौरमंडल के पहले ग्रह बुध की कक्षा में मौजूद नासा के पहले मिशन मैसेंजर ने। मैसेंजर ने ये तस्वीर उस वक्त ली है जबकि बुध सूरज के दूसरी ओर था। सूरज हमसे 15 करोड़ किलोमीटर दूर है, लेकिन जब मैसेंजर ने अपना कैमरा हमारी ओर फोकस किया उस वक्त वो 18 करोड़ 30 लाख किलोमीटर दूर था। 
पृथ्वी और चंद्रमा की एकसाथ ली गई ये अब तक की सबसे अद्भुत तस्वीर है। इसे एक बार फिर देखिए, क्या ऐसा नहीं लगता कि सितारों भरे मेले में एक नन्हें बच्चे जैसा चंद्रमा अपनी मां पृथ्वी की उंगली थामे घूम रहा हो। मैसेंजर अपने मिशन में एक ऐसी स्थिति में है जब वो बुध और सूरज के बीच रहकर उल्काओं की तरह वहां आवारा घूमने वाले छोटे पथरीले पदार्थों वॉल्केनोइड्स की खोज कर रहा है। माना जाता है कि वॉल्केनोइड्स बुध और सूर्य के बीच घूमते रहते हैं, लेकिन अब तक इनके कोई भी निशान नहीं मिले हैं।

नासा ने 3 अगस्त 2004 को मैसेंजर लांच किया था, इस मिशन का मकसद था बुध की कक्षा में रहकर इस ग्रह के वातावरण, यहां के धरातल की रासायनिक संरचना, बुध के भौगोलिक इतिहास, चुंबकीय क्षेत्र की प्रकृति और बुध के केंद्र यानि कोर के आकार और उसकी स्थिति का पता लगाना। मैसेंजर बुध पर पिछले 30 साल में गया नासा का पहला मिशन है। इससे पहले मैरिनर-10 ने 1975 में बुध का जायजा लिया था। 2004 से लेकर 2009 तक बुध को करीब से देखने-समझने के लिए मैसेंजर तीन फ्लाई-बाई अभियान पूरे कर चुका है। मैसेंजर ने बुध के ऐसे अनोखे नजारे दिखाए, जैसे पहले कभी किसी ने नहीं देखे थे। मैसेंजर ने बुध से सबसे बड़ी खबर भेजी थी जुलाई 2008 में, उस पल को याद करके मिशन मैसेंजर के टीम मेंबर थॉमस जर्बुकेन अब भी उत्साह से भर उठते हैं। जर्बुकेन बताते हैं मैसेंजर ने बुध के एक्सोस्फियर में भारी मात्रा में पानी की मौजूदगी की खबर भेजी थी। बुध से आई अबतक की ये सबसे बड़ी खबर थी। बुध ऐसा अनोखा ग्रह है जहां दिन का तापमान करीब 500 डिग्री सेंटीग्रेड तक चढ़ जाता है लेकिन रात शून्य से 183 डिग्री सेंटीग्रेड तक ठंडी होती है। सूरज के बेहद करीब, दहकती हुई दुनिया में पानी की मौजूदगी मुमकिन हो सकती है, किसी ने इसके बारे में कभी सपने में भी नहीं सोंचा था। मैसेंजर ने इस बात के सबूत दिए हैं कि बुध की धरती पर ज्वालामुखियों का विस्फोट लगातार जारी है और इस ग्रह का कोर पृथ्वी के जैसा तरल है।
मैसेंजर से करीब 30 साल पहले बुध को नजदीक से देखने की हिम्मत सबसे पहले नासा के प्रोब मैरिनर-10 ने की थी। मैरिनर-10 के कैमरे से ही हम पहली बार बुध की झलक करीब से देख सके थे। बुध के करीब जाने के आठ दिन बाद 24 मार्च 1975 को मैरिनर-10 का ईंधन खत्म हो गया और इस प्रोब का कंप्यूटर बंद हो गया। मैरिनर-10 खत्म हो गया, लेकिन वो बुध पर नहीं जा गिरा, बल्कि माना जाता है कि करीब 35 साल पहले बुध के सफर पर गया ये स्पेस प्रोब अब भी बुध और सूरज के बीच कहीं मौजूद रहकर सूरज की परिक्रमा कर रहा है।

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